ओमान का एक राजनयिक प्रतिनिधिमंडल 24 जुलाई 2026 को तेहरान पहुँचा। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही को सुरक्षित बनाना है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच, यह बातचीत समुद्री सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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जॉइंट वर्किंग ग्रुप का गठन
ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi और ओमान के विदेश मंत्री Sayyid Badr bin Hamad Al Busaidi के बीच फोन पर विस्तार से चर्चा हुई। दोनों देशों ने तय किया है कि वे एक ‘जॉइंट वर्किंग ग्रुप’ बनाएंगे। यह ग्रुप भविष्य में समुद्री नेविगेशन, जरूरी सेवाओं और इससे जुड़े खर्चों पर काम करेगा। इस चर्चा में क्षेत्र के अन्य देशों को भी शामिल करने की योजना है ताकि समुद्र में किसी भी तरह के तनाव को रोका जा सके।
ईरानी अधिकारियों का रुख
ईरान का मानना है कि फारस की खाड़ी (Persian Gulf) की सुरक्षा सिर्फ यहाँ के देशों की जिम्मेदारी है और इसमें बाहरी दखलअंदाजी नहीं होनी चाहिए। तेहरान ने अमेरिका की मौजूदगी को क्षेत्र में अस्थिरता का मुख्य कारण बताया है। विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने साफ कहा है कि जब तक हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर उनकी शर्तें पूरी नहीं होतीं, तब तक वे कोई भी युद्धविराम स्वीकार नहीं करेंगे। वहीं ओमान ने ‘Islamabad Memorandum of Understanding’ का समर्थन करते हुए बातचीत के जरिए समाधान खोजने पर जोर दिया है।
