ओमान और मलेशिया ने ईरान में चल रहे युद्ध को तुरंत रोकने की मांग की है। ओमान के विदेश मंत्री और मलेशिया के प्रधानमंत्री ने एक साझा बयान जारी करके इसे अमेरिका और इजराइल का ईरान पर युद्ध बताया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि सैन्य हमले बढ़ने से दुनिया भर की अर्थव्यवस्था और क्षेत्रीय सुरक्षा खतरे में पड़ गई है। इस युद्ध का असर सऊदी अरब, यूएई, कतर, कुवैत और इराक जैसे कई खाड़ी देशों पर भी देखने को मिल रहा है। कूटनीतिक बातचीत के जरिए इस मामले को सुलझाने पर जोर दिया गया है ताकि युद्ध का दायरा और ना फैले।
ℹ️: UAE के राष्ट्रपति पहुंचे Ministry of Defence, रीजनल टेंशन के बीच सेना की तैयारियों की हुई समीक्षा।
फ्लाइट और शिपिंग रूट पर क्या असर पड़ा है?
युद्ध के कारण खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और वहां से होने वाले व्यापार पर सीधा असर हो रहा है। समुद्री रास्तों और हवाई यात्राओं में कई तरह की रुकावटें आ गई हैं।
- Strait of Hormuz में जहाजों की आवाजाही 70 प्रतिशत तक कम हो गई है।
- दुबई जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट बंद होने से हवाई माल ढुलाई की क्षमता 20 प्रतिशत गिर गई है।
- एशिया से यूरोप तक सामान भेजने का हवाई खर्च 45 प्रतिशत बढ़ गया है।
- बड़ी शिपिंग कंपनियों ने मिडिल ईस्ट के लिए नई बुकिंग रोक दी है और कई कंपनियों ने वॉर रिस्क सरचार्ज लगा दिया है।
- इस तनाव के कारण दुनिया भर में तेल और गैस की कीमतों में भारी उछाल आया है।
खाड़ी देशों में रहने वालों के लिए क्या हैं नए निर्देश?
ओमान और मलेशिया ने UN Security Council से इस मामले में दखल देकर तुरंत युद्धविराम लागू करने की मांग की है। मलेशिया के विदेश मंत्रालय ने अपने नागरिकों के लिए एक नई एडवाइजरी जारी की है। इसमें लोगों को 10 मिडिल ईस्ट देशों की यात्रा टालने की सलाह दी गई है। इन देशों में ईरान, ओमान और सऊदी अरब प्रमुख रूप से शामिल हैं। जो नागरिक पहले से प्रभावित इलाकों में रह रहे हैं, उन्हें e-Konsular पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करने का निर्देश दिया गया है ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति में उन्हें सुरक्षित निकाला जा सके।
