ओमान ने पर्यावरण के अनुकूल ऊर्जा क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाया है। ओमान ने नीदरलैंड के साथ मिलकर ग्रीन हाइड्रोजन के निर्यात की संभावनाओं को जांचने के लिए एक खास समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते के जरिए दोनों देश मिलकर यह देखेंगे कि ओमान से यूरोप तक ग्रीन हाइड्रोजन को व्यवसायिक रूप से कैसे और कितने खर्च में पहुंचाया जा सकता है। इस महत्वपूर्ण डील पर रॉटरडैम में आयोजित वर्ल्ड हाइड्रोजन समिट के दौरान मुहर लगी है।
ओमान और नीदरलैंड के बीच हुए इस समझौते की मुख्य बातें क्या हैं?
यह समझौता ओमान और नीदरलैंड के बीच ऊर्जा व्यापार को बढ़ावा देने के लिए एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। इस समझौते से जुड़ी प्रमुख बातें नीचे दी गई हैं:
- समझौते की तारीख: इस समझौते पर नीदरलैंड के रॉटरडैम में 19 से 21 मई 2026 तक चले वर्ल्ड हाइड्रोजन समिट के दौरान हस्ताक्षर किए गए थे।
- पहली खेप की तैयारी: ओमान के ऊर्जा और खनिज मंत्री सलीम बिन नासिर अल औफी ने बताया है कि मई 2027 के आसपास ग्रीन अमोनिया की पहली खेप यूरोप भेजी जा सकती है।
- नूरब्रिज प्रोजेक्ट: यह पूरा काम नूरब्रिज प्रोजेक्ट (NoorBridge project) के तहत किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य ओमान और नीदरलैंड के बीच ग्रीन हाइड्रोजन के व्यापार के लिए एक सीधा रास्ता बनाना है।
- लॉजिस्टिक्स का अध्ययन: दोनों देश मिलकर ट्रांसपोर्टेशन के रास्ते, लॉजिस्टिक्स की लागत और सप्लाई चेन से जुड़ी जरूरतों का अध्ययन करेंगे ताकि निर्यात को आसान बनाया जा सके।
इस बड़े एनर्जी कॉरिडोर में कौन-कौन सी कंपनियां शामिल हैं?
इस बड़े प्रोजेक्ट को सफल बनाने के लिए ओमान और नीदरलैंड की कई सरकारी और निजी कंपनियां एक साथ मिलकर काम कर रही हैं। ओमान की तरफ से राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन संचालक हाइड्रोम (Hydrom), ओक्यू (OQ) ग्रुप, सोहार पोर्ट एंड फ्रीजोन और पोर्ट ऑफ दुकम इसमें मुख्य भूमिका निभा रहे हैं।
नीदरलैंड की तरफ से पोर्ट ऑफ रॉटरडैम, हॉलैंड हाइड्रोजन हब और गैसयूनी (Gasunie) जैसी प्रमुख कंपनियां इस प्रोजेक्ट में सहयोग कर रही हैं। इसके अलावा, जर्मनी के साथ मिलकर भी लिक्विड हाइड्रोजन कॉरिडोर बनाने की चर्चा चल रही है, जिसमें पोर्ट ऑफ डुइसबर्ग और जर्मन लॉजिस्टिक्स कंपनियां शामिल हैं। ओमान के ऊर्जा मंत्री ने साफ किया है कि भविष्य की ऊर्जा जरूरतों और पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए ग्रीन हाइड्रोजन बेहद जरूरी है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
ओमान से यूरोप के लिए ग्रीन अमोनिया की पहली शिपमेंट कब तक भेजी जाएगी?
ओमान के ऊर्जा और खनिज मंत्रालय के अनुसार, ओमान से यूरोप के लिए ग्रीन अमोनिया की पहली खेप मई 2027 के आसपास भेजने की योजना बनाई गई है।
नूरब्रिज प्रोजेक्ट क्या है?
नूरब्रिज प्रोजेक्ट ओमान और नीदरलैंड के बीच एक स्वच्छ ऊर्जा पहल है, जिसका मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच ग्रीन हाइड्रोजन के सुरक्षित और व्यवसायिक निर्यात के लिए एक सीधा कॉरिडोर तैयार करना है।