ओमान सरकार ने रिश्वतखोरी को रोकने के लिए अपने कानूनों में बहुत बड़े बदलाव किए हैं। अब सिर्फ सरकारी अफसर ही नहीं, बल्कि प्राइवेट कंपनियों में काम करने वाले लोग भी रिश्वत लेने या देने पर जेल जा सकते हैं। यह नियम उन सभी लोगों के लिए है जो ओमान में नौकरी कर रहे हैं और यहां के नियमों का पालन करते हैं।
Royal Decree No. 36/2023 के तहत अब प्राइवेट सेक्टर, संस्थानों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में काम करने वालों पर भी आपराधिक मामला चलेगा। इस कानून के आने के बाद अब कंपनी के मालिकों, बोर्ड मेंबर्स और कर्मचारियों की जवाबदेही बढ़ गई है। अगर कोई कर्मचारी या मालिक रिश्वत मांगता या लेता है, तो उसे कड़ी सजा भुगतनी होगी।
रिश्वतखोरी पर कड़ी सजा और जुर्माना
सरकार ने अलग-अलग तरह की रिश्वतखोरी के लिए सजा तय की है, जो नीचे दी गई टेबल में समझाई गई है:
| अपराध | जेल की सजा | जुर्माना |
|---|---|---|
| रिश्वत मांगना या लेना | 1 से 3 साल | रिश्वत की रकम के बराबर या उससे ज्यादा |
| ड्यूटी के बदले रिश्वत लेना | 3 से 5 साल | भारी आर्थिक दंड |
| रिश्वत की पेशकश करना (भले ही मना कर दिया गया हो) | 3 महीने से 1 साल | लागू नियम अनुसार |
| लेबर लॉ के तहत बिना मंजूरी फायदा लेना | 3 महीने से 3 साल | 1,000 से 5,000 ओमानी रियाल |
Royal Decree No. 66/2026 के जरिए लेबर लॉ के आर्टिकल 146 में भी बदलाव किए गए हैं। इसके मुताबिक, अगर कोई वर्कर अपने मालिक की मंजूरी के बिना किसी से पैसे, तोहफे या किसी भी तरह का फायदा लेता है, तो उसे जेल और भारी जुर्माना दोनों भुगतने पड़ सकते हैं।
ओमान सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी लड़ाई को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मजबूत किया है। देश 2013 से ही संयुक्त राष्ट्र भ्रष्टाचार विरोधी कन्वेंशन (UNCAC) का हिस्सा है। स्टेट फाइनेंशियल एंड एडमिनिस्ट्रेटिव ऑडिट इंस्टीट्यूशन (SFAAI) इन नियमों को लागू करवाने का काम देख रहा है।
अदालतों ने हाल के दिनों में भ्रष्टाचार के कई बड़े मामलों में भारी जुर्माना और जेल की सजा सुनाई है। सरकार का साफ कहना है कि वर्कप्लेस पर ईमानदारी बनी रहे और कोई भी कर्मचारी अपने पद का फायदा उठाकर निजी लाभ न कमाए।
