ओमान सरकार ने भ्रष्टाचार को रोकने के लिए बहुत कड़े कदम उठाए हैं। अब नए कानून के तहत प्राइवेट सेक्टर में रिश्वत लेने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी। रॉयल डिक्री 66/2026 के जरिए यह नियम लागू किया गया है ताकि देश के कामकाज में ईमानदारी और पारदर्शिता बनी रहे।

रॉयल डिक्री 66/2026 को 23 जून 2026 को जारी किया गया और इसे 28 जून 2026 को ऑफिशियल गजट में छापा गया। यह कानून अब पूरी तरह लागू हो चुका है। इस नए बदलाव के तहत लेबर लॉ (Royal Decree 53/2023) के आर्टिकल 146 को हटा दिया गया है। अब रिश्वतखोरी से जुड़े मामलों को पेनल कोड के एक नए चैप्टर के तहत देखा जाएगा।

किन्हें होगा असर और क्या हैं नियम

यह कानून प्राइवेट कंपनियों, संस्थानों और ओमान में काम करने वाली इंटरनेशनल संस्थाओं पर लागू होगा। इसमें कंपनी के मालिक, बोर्ड मेंबर और आम कर्मचारी सभी शामिल हैं। अगर कोई कर्मचारी अपनी ड्यूटी के बदले कोई तोहफा, वादा या किसी भी तरह का फायदा लेता है, तो उसे कानूनन अपराधी माना जाएगा।

  • आम रिश्वतखोरी: ड्यूटी के बदले रिश्वत लेने या मांगने पर 1 से 3 साल की जेल और जुर्माना होगा।
  • गंभीर मामले: अगर कर्मचारी ने अपने पद का गलत इस्तेमाल कर काम किया है, तो सजा 3 साल से 5 साल तक हो सकती है।
  • रिश्वत की कोशिश: अगर किसी ने रिश्वत देने की कोशिश की, भले ही सामने वाले ने उसे लेने से मना कर दिया हो, तो देने वाले को 3 महीने से 1 साल तक की जेल हो सकती है।
  • बिचौलिए: रिश्वत दिलाने में मदद करने वाले बिचौलियों को भी वही सजा मिलेगी जो मुख्य आरोपी को मिलती है।

कब मिलेगी सजा में राहत

सरकार ने उन लोगों के लिए छूट का रास्ता भी रखा है जो अपनी गलती मान लेते हैं। अगर कोई अपराधी अधिकारियों के पता लगाने से पहले खुद सामने आकर अपना जुर्म कबूल कर लेता है, तो उसे सजा से छूट मिल सकती है। वहीं, अगर जांच शुरू होने के बाद कबूलनामा किया जाता है, तो इसे सजा कम करने के आधार के रूप में देखा जा सकता है।

यह नियम केवल प्राइवेट सेक्टर और इंटरनेशनल संस्थाओं के लिए है। सरकारी कर्मचारियों और सरकारी हिस्सेदारी वाली कंपनियों के लोग पहले से लागू सार्वजनिक अधिकारियों वाले भ्रष्टाचार कानूनों के दायरे में ही रहेंगे।