ओमान में रहने वाले प्रवासियों और वहां के नागरिकों के लिए एक बहुत जरूरी खबर सामने आई है। ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक ने देश में साइबर अपराधों से निपटने के लिए एक सख्त कानून लागू कर दिया है। रॉयल डिक्री नंबर 61/2026 के जरिए जारी हुआ यह कानून 2 जून 2026 से पूरे देश में प्रभावी हो गया है। अब इंटरनेट या सोशल मीडिया पर की गई छोटी सी गलती भी बड़ी मुसीबत बन सकती है।
नए साइबर कानून के तहत किन चीज़ों को माना गया है अपराध?
परिवहन, संचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अनुसार, इस नए कानून का मुख्य मकसद लोगों की प्राइवेसी और सम्मान की रक्षा करना है। नए कानून के तहत इंटरनेट पर की जाने वाली कई गतिविधियों को अब गंभीर अपराध माना जाएगा, जिनमें ये शामिल हैं:
- किसी भी व्यक्ति को ऑनलाइन धमकी देना या ब्लैकमेल करना।
- इंटरनेट के जरिए किसी भी तरह की धोखाधड़ी या ऑनलाइन गाली-गलौज करना।
- सोशल मीडिया पर झूठी अफवाहें फैलाना जिससे समाज की शांति व्यवस्था बिगड़े।
- आतंकवाद को बढ़ावा देने वाली सामग्री, जातिवाद और नफरत फैलाने वाले भाषण पोस्ट करना।
भारतीय प्रवासियों और नागरिकों पर इसका क्या असर होगा?
ओमान में रहने वाले भारतीय प्रवासियों के लिए यह कानून बेहद महत्वपूर्ण है। अक्सर अनजाने में सोशल मीडिया पर पोस्ट या शेयर की गई चीजें मुसीबत खड़ी कर सकती हैं। ओमान के पब्लिक प्रोसिक्यूशन ने चेतावनी दी है कि इस नए साइबर अपराध कानून की धारा 18 के तहत ऑनलाइन ब्लैकमेल और डिजिटल धमकियां देना गंभीर दंडनीय अपराध हैं। अधिकारियों ने सभी लोगों को सलाह दी है कि वे इंटरनेट पर अपनी निजी और संवेदनशील जानकारी किसी के साथ साझा न करें और किसी भी घटना की रिपोर्ट तुरंत आधिकारिक चैनलों पर दर्ज करवाएं।
Frequently Asked Questions (FAQs)
ओमान का नया साइबर अपराध कानून कब से लागू हुआ है?
ओमान का नया साइबर अपराध कानून रॉयल डिक्री संख्या 61/2026 के तहत 2 जून 2026 से पूरे देश में लागू कर दिया गया है।
नए कानून के तहत सोशल मीडिया पर क्या करने की मनाही है?
नए कानून के तहत किसी को ऑनलाइन धमकी देना, ब्लैकमेल करना, अफवाहें फैलाना, धोखाधड़ी करना और नफरत फैलाने वाली सामग्री शेयर करना सख्त मना है।
