ओमान ने हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुज़रने वाले जहाजों पर किसी भी तरह का शुल्क या टैक्स लगाने से साफ़ इनकार कर दिया है। यह समुद्री रास्ता दुनिया के व्यापार के लिए बहुत ज़रूरी है, इसलिए ओमान के इस फैसले का बड़ा असर पड़ेगा। अमेरिका ने भी इस फैसले का समर्थन किया है, जबकि ईरान इस मामले में अलग राय रखता है।

ओमान के विदेश मंत्री Badr al-Busaidi ने बहरीन में हुई गल्फ देशों की मीटिंग में साफ़ किया कि भविष्य में इस रास्ते से गुज़रने के लिए कोई ट्रांजिट फीस नहीं ली जाएगी। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून के हिसाब से समुद्री जहाजों की आवाजाही को सुरक्षित रखना ओमान की ज़िम्मेदारी है। यह बयान तब आया जब ईरान इस रास्ते से गुज़रने वाले जहाजों से पैसे लेने की कोशिश कर रहा था।

अमेरिका के विदेश मंत्री Marco Rubio ने भी इस बात का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य किसी एक देश की जागीर नहीं है और यहाँ टोल वसूलना गलत है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून (UNCLOS 1982) के मुताबिक भी तटीय देश केवल रास्ता देने के नाम पर पैसा नहीं वसूल सकते।

दूसरी तरफ, ईरान का कहना है कि यह इलाका उसके और ओमान के क्षेत्रीय जल क्षेत्र में आता है। ईरान ने ‘पर्यावरण शुल्क’ (Environmental Fees) लेने की बात कही है ताकि समुद्र को होने वाले नुकसान की भरपाई की जा सके। तनाव इतना बढ़ गया है कि ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने चेतावनी दी है कि बिना इजाज़त गुज़रने वाले जहाजों के साथ सख्ती की जाएगी। 25 जून को ओमान तट के पास एक कार्गो जहाज़ पर हमला भी हुआ था, जिससे यूएन की एजेंसी को जहाजों को खाली कराने के काम में रुकावट आई।

इन सबके बीच अमेरिका और ईरान के बीच 14 जून को एक समझौता हुआ था, जिसे ‘इस्लामाबाद अंडरस्टैंडिंग’ कहा जा रहा है। इस समझौते के तहत 18 जून से नौसेना की नाकेबंदी हटा ली गई और 60 दिनों के लिए जहाजों को मुफ्त आने-जाने की अनुमति दी गई है ताकि बातचीत आगे बढ़ सके।

हालांकि, कुछ खबरों के मुताबिक ओमान के अधिकारियों ने निजी तौर पर यूरोपीय देशों से कहा है कि पुराने समय जैसी स्थिति वापस आना मुश्किल है। उन्होंने संकेत दिया कि जहाजों से सफाई या नेविगेशन जैसी सेवाओं के लिए पैसे लिए जा सकते हैं, लेकिन यह अनिवार्य होगा या नहीं, इस पर अभी कोई जानकारी नहीं है। फिलहाल, इस रास्ते पर जहाजों की आवाजाही बढ़ी है और अमेरिका की CENTCOM टीम सुरक्षित रास्ते के लिए समन्वय कर रही है।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.