ओमान में रहने वाले भारतीयों के लिए एक ज़रूरी खबर आई है. भारतीय रुपया ओमान रियाल के मुकाबले एक बार फिर गिर गया है. 12 मई 2026 को रुपये की कीमत 248.79 तक पहुंच गई है. इस बदलाव का सीधा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो ओमान से भारत पैसा भेजते हैं.

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रुपया कितना गिरा और क्या है ताज़ा रेट

ताज़ा जानकारी के मुताबिक ओमान रियाल के मुकाबले भारतीय रुपये में गिरावट देखी गई है. मस्कट डेली की रिपोर्ट के अनुसार अब 1 ओमान रियाल की कीमत लगभग 248.79 रुपये हो गई है. पिछले कुछ समय में रुपये ने कई बार निचले स्तर को छुआ है, जिससे प्रवासियों के लिए विदेशी मुद्रा का लेन-देन प्रभावित हो रहा है.

विवरण आंकड़े/जानकारी
मौजूदा रेट (12 मई 2026) 248.79 रुपये
1 भारतीय रुपया (INR) 0.0040 ओमान रियाल (OMR)
प्रतिशत बदलाव -0.936%
RBI विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट 7.79 बिलियन डॉलर
30 अप्रैल का रेट (अनुमानित) 246.35 रुपये
विदेशी निवेश की निकासी (मार्च-अप्रैल) 19 बिलियन डॉलर

रुपये की कीमत गिरने के पीछे क्या कारण हैं

रुपये में इस गिरावट की कई वजहें बताई जा रही हैं. दुनिया भर के बाजारों में अनिश्चितता और वित्तीय बदलावों का असर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा दरों पर पड़ रहा है. इसके अलावा मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव की वजह से तेल की कीमतें बढ़ी हैं, जिससे भारत का आयात बिल बढ़ गया है और डॉलर की मांग बढ़ी है. अमेरिका के फेडरल रिजर्व द्वारा मौद्रिक नीति में सख्ती के संकेतों से भी निवेशक उभरते बाजारों से पैसा निकाल रहे हैं.

RBI ने रुपये को बचाने के लिए क्या कदम उठाए

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रुपये को और गिरने से रोकने के लिए हस्तक्षेप किया है. RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि बैंक बदलती परिस्थितियों और महंगाई के आंकड़ों पर नज़र रख रहा है. रुपये को सपोर्ट करने के लिए आरबीआई ने अपने विदेशी मुद्रा भंडार का इस्तेमाल किया, जिससे 1 मई तक के हफ्ते में भंडार 7.79 बिलियन डॉलर कम हो गया.

Frequently Asked Questions (FAQs)

ओमान रियाल के मुकाबले रुपया क्यों गिर रहा है

ग्लोबल मार्केट में अस्थिरता, मिडिल ईस्ट तनाव के कारण बढ़ी तेल की कीमतें और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सख्त मौद्रिक नीतियों की वजह से रुपये की वैल्यू कम हुई है.

क्या RBI ने रुपये को संभालने की कोशिश की

हाँ, RBI ने रुपये को सपोर्ट करने के लिए विदेशी मुद्रा भंडार का उपयोग किया, जिससे 1 मई तक के हफ्ते में भंडार में 7.79 बिलियन डॉलर की कमी आई.