ओमान के सलालाह (Salalah) पोर्ट पर 11 मार्च को ड्रोन से बड़ा हमला हुआ है. इस हमले में तेल डिपो के तीन टैंकों में भीषण आग लग गई. ईरान की सेना IRGC ने इस घटना को बेहद संदिग्ध बताया है और आधिकारिक तौर पर इसकी जांच शुरू कर दी है. ईरान ने साफ कहा है कि उसका इस हमले से कोई लेना-देना नहीं है और वह अपने पड़ोसी देश ओमान का पूरा सम्मान करता है.
हमले के बाद ओमान ने क्या कदम उठाए
- हमले के कारण सलालाह पोर्ट के मीना पेट्रोलियम फैसिलिटी में तीन ईंधन टैंकों में आग लग गई, जिसे इमरजेंसी टीमों ने बुझा दिया है.
- गनीमत यह रही कि इस घटना में किसी भी नागरिक की जान नहीं गई और व्यापारिक जहाजों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है.
- सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ओमान ने अपने मुख्य तेल निर्यात टर्मिनल मीना अल-फहल (Mina Al-Fahal) से सभी जहाजों को दूसरी सुरक्षित जगह शिफ्ट कर दिया है.
- ओमान के दक्षिणी तट यानी ढोफर इलाके में समुद्री सुरक्षा बढ़ा दी गई है और इंटरनेशनल सिक्योरिटी कंपनियों के साथ मिलकर निगरानी की जा रही है.
ईरान का बयान और साज़िश का शक
ईरान की न्यूज़ एजेंसी IRNA के मुताबिक, IRGC के प्रवक्ता ने इस हमले को ओमान और ईरान के रिश्तों को खराब करने की साज़िश बताया है. ईरान के अधिकारियों को शक है कि यह अमेरिका या इजराइल की तरफ से किया गया एक ऑपरेशन हो सकता है ताकि मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़े.
इस घटना के तुरंत बाद ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक से फोन पर बातचीत की. उन्होंने सुल्तान को भरोसा दिलाया कि ईरान अपने पड़ोसियों के साथ हमेशा अच्छे रिश्ते रखना चाहता है और इस हमले की पूरी सच्चाई सामने लाने के लिए कड़ी जांच करेगा.
सऊदी अरब और कतर जैसे अन्य खाड़ी देशों ने भी इस हमले की निंदा की है और इसे ओमान की सुरक्षा के खिलाफ बताया है. वहीं ओमान की न्यूज़ एजेंसी (ONA) ने साफ किया है कि देश में तेल की सप्लाई पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है.
