ओमान के सुल्तान हइथम बिन तारिक ने मस्कट के अल बरका पैलेस में कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान बिन जसीम अल थानी का स्वागत किया। यह हाई-लेवल मुलाकात 24 जून 2026 को हुई, जिसमें दोनों देशों ने आपसी रिश्तों को और मजबूत करने पर बात की। इस मुलाकात से ठीक एक दिन पहले कतर के प्रधानमंत्री ने ओमान के विदेश मंत्री सय्यद बद्र बिन हमद अल बुसैदी के साथ भी चर्चा की थी।
इन मुद्दों पर हुई अहम बातचीत
बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने कई जरूरी विषयों पर चर्चा की, जो पूरे क्षेत्र की शांति और सुरक्षा से जुड़े हैं:
- आपसी रिश्ते: ओमान और कतर ने अपने मजबूत संबंधों की समीक्षा की और आर्थिक व निवेश कार्यक्रमों में सहयोग बढ़ाने पर बात की।
- अमेरिका-ईरान बातचीत: मीटिंग में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत पर चर्चा हुई, जिसमें कतर और पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। कतर ने इस बातचीत का पूरा समर्थन किया ताकि शांतिपूर्ण तरीके से समाधान निकल सके।
- Strait of Hormuz की सुरक्षा: इस बात पर जोर दिया गया कि Strait of Hormuz में अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही बिना किसी रोक-टोक और बिना किसी फीस के होनी चाहिए। यह सब अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक होना चाहिए ताकि समुद्री व्यापार सुरक्षित रहे।
- क्षेत्रीय स्थिरता: सुल्तान हइथम बिन तारिक ने कहा कि क्षेत्र में शांति लाने के लिए डिप्लोमैटिक कोशिशें जारी रखनी होंगी और अन्य मित्र देशों के साथ मिलकर काम करना होगा।
ओमान की भूमिका की हुई तारीफ
कतर के प्रधानमंत्री ने ओमान की इस बात के लिए सराहना की कि वह अलग-अलग देशों के बीच बातचीत का रास्ता बनाने और विवादों को सुलझाने में बहुत बड़ी भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि ओमान ने बातचीत के नए रास्ते खोलकर सबको साथ लाने का काम किया है।
बैठक में शामिल अहम लोग
ओमान की तरफ से इस बैठक में डिप्टी प्रधानमंत्री सय्यद Theyazin बिन हइथम अल सईद, विदेश मंत्री सय्यद बद्र बिन हमद अल बुसैदी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। वहीं कतर की तरफ से विदेश मंत्रालय के राज्य मंत्री डॉ. मोहम्मद बिन अब्दुलअजीज अल खुलाईफी और ओमान में कतर के राजदूत शेख मुबारक बिन फहद अल थानी शामिल हुए।
बता दें कि यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब ओमान और ईरान ने Strait of Hormuz के प्रबंधन और नेविगेशन सेवाओं के लिए एक जॉइंट वर्किंग ग्रुप बनाने का फैसला किया है। कतर का यह कदम खाड़ी देशों, इराक और ईरान के बीच होने वाली बड़ी बातचीत की तैयारी का हिस्सा माना जा रहा है।
