अमेरिका और ईरान के बीच जंग खत्म करने के लिए पाकिस्तान के इस्लामाबाद में एक बड़ा समझौता हुआ है। ओमान ने अब इस ‘इस्लामाबाद’ समझौते का पूरी तरह से समर्थन किया है। इस फैसले से मिडिल ईस्ट में शांति आने की उम्मीद बढ़ गई है और क्षेत्र में तनाव कम होने की संभावना है।

यह समझौता 17 जून 2026 को अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump और ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian के बीच हुआ था। ओमान के विदेश मंत्री Badr Albusaidi ने 15 जून को ही इस पहल का स्वागत कर दिया था और इसे कूटनीति की जीत बताया था। इसके बाद 23 जून 2026 को जब ईरान के संसद अध्यक्ष Dr. Mohammad Bagher Ghalibaf और विदेश मंत्री Dr. Abbas Araghchi मस्कट पहुंचे, तब ओमान ने आधिकारिक तौर पर इस समझौते पर अपनी मुहर लगा दी।

समझौते की बड़ी बातें और शर्तें

इस समझौते में 14 मुख्य बिंदु रखे गए हैं, जिनका मकसद लड़ाई को पूरी तरह रोकना और आर्थिक रिश्तों को फिर से शुरू करना है। नीचे दी गई टेबल में समझौते की मुख्य जानकारी दी गई है:

मुख्य बिंदु विवरण
लड़ाई की समाप्ति लेबनान समेत सभी मोर्चों पर सैन्य अभियान तुरंत और हमेशा के लिए बंद होंगे।
हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) व्यापारिक जहाजों के लिए रास्ता खुलेगा और 60 दिनों तक कोई टोल नहीं लगेगा।
तेल प्रतिबंध अमेरिका ने 21 जून 2026 से 60 दिनों के लिए ईरान के तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंध हटा लिए।
पुनर्निर्माण फंड अमेरिका ईरान के आर्थिक विकास और पुनर्निर्माण के लिए 300 बिलियन डॉलर का प्लान बनाएगा।
परमाणु कार्यक्रम ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाएगा और यूरेनियम को वेपन-ग्रेड से घटाकर रिएक्टर-ग्रेड करेगा।
बातचीत की अवधि अंतिम समझौते के लिए 60 दिनों का समय तय किया गया है, जिसे आगे बढ़ाया जा सकता है।

हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य के मैनेजमेंट को लेकर ओमान की भूमिका अहम होगी। समझौते के मुताबिक, ईरान इस रास्ते के भविष्य के प्रशासन के लिए ओमान और अन्य क्षेत्रीय देशों के साथ मिलकर काम करेगा। इसके लिए 23 जून को ओमान और ईरान एक जॉइंट वर्किंग ग्रुप बनाने पर भी सहमत हुए हैं।

समझौते को लागू करने के लिए चार वर्किंग ग्रुप बनाए गए हैं, जो प्रतिबंध हटाने, परमाणु मुद्दों, आर्थिक विकास और निगरानी का काम देखेंगे। इस पूरी प्रक्रिया की देखरेख एक हाई-लेवल कमेटी करेगी, जिसमें अमेरिका के उपराष्ट्रपति और पाकिस्तान व कतर के प्रधानमंत्री शामिल होंगे। ईरान के सुप्रीम लीडर Mojtaba Khamenei ने भी कुछ शंकाओं के बावजूद इस समझौते को अपनी मंजूरी दे दी है।