तेल उत्पादक देशों के संगठन OPEC+ ने जुलाई 2026 से कच्चे तेल के उत्पादन में प्रतिदिन 1.88 लाख बैरल की बढ़ोतरी करने का फैसला किया है। सऊदी अरब और रूस सहित सात प्रमुख देशों ने मिलकर यह बड़ा फैसला लिया है। हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि ईरान के साथ चल रही जंग और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जारी तनाव के कारण इस फैसले से बाजार को तुरंत कोई बड़ी राहत मिलने की उम्मीद कम है।

OPEC+ ने तेल उत्पादन बढ़ाने का फैसला क्यों लिया है?

OPEC+ के सात प्रमुख देशों यानी सऊदी अरब, रूस, इराक, कुवैत, कजाकिस्तान, अल्जीरिया और ओमान ने रविवार 7 जून 2026 को हुई बैठक में यह फैसला लिया है। इस फैसले का मुख्य उद्देश्य वैश्विक तेल बाजार में स्थिरता लाना है। यह लगातार चौथा महीना है जब संगठन ने धीरे-धीरे अपनी स्वैच्छिक कटौती को कम करते हुए उत्पादन कोटा बढ़ाने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही जिन देशों ने जनवरी 2024 से अधिक उत्पादन किया था, उन्हें इसकी भरपाई करने के लिए दिसंबर 2026 तक का समय दिया गया है।

ईरान युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य संकट से क्या है रुकावट?

बाजार विश्लेषक जॉर्ज लियोन के अनुसार, 1.88 लाख बैरल प्रतिदिन की बढ़ोतरी असल आपूर्ति बढ़ाने से ज्यादा एक नीतिगत संकेत है। इसका कारण यह है कि 28 फरवरी 2026 से अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध की वजह से होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाली तेल सप्लाई बुरी तरह प्रभावित है। ईरान ने इस मार्ग को लगभग ब्लॉक कर रखा है, जिससे शिपिंग कंपनियों को अपनी लोकेशन छुपाकर (डार्क ट्रांजिट) तेल ले जाना पड़ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प इस मार्ग को फिर से खोलने के लिए बातचीत कर रहे हैं और उन्हें सितंबर तक समझौते की उम्मीद है।

क्या इस फैसले से आम जनता और प्रवासियों को मिलेगी राहत?

तेल क्षेत्र के विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर तुरंत कोई समझौता हो भी जाता है, तो भी सप्लाई की यह कमी साल 2026 के अंत तक बनी रह सकती है। खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय प्रवासियों और आम लोगों के लिए तेल की कीमतों में तुरंत भारी गिरावट की संभावना कम है क्योंकि बाजार में कच्चे तेल की भौतिक उपलब्धता अभी भी कम बनी हुई है। इसके अलावा, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने 1 मई 2026 को लगभग 60 साल बाद OPEC की सदस्यता छोड़ दी थी, जिसका असर भी उत्पादन नीतियों पर दिख रहा है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

OPEC+ जुलाई 2026 में कितना तेल उत्पादन बढ़ा रहा है?

OPEC+ ने जुलाई 2026 से रोजाना 1,88,000 बैरल कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ाने का फैसला किया है। यह फैसला सऊदी अरब, रूस और कुवैत सहित सात देशों ने मिलकर लिया है।

तेल उत्पादन बढ़ने के बाद भी बाजार में राहत क्यों नहीं मिल रही है?

क्योंकि ईरान के साथ चल रहे युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की सप्लाई रुकी हुई है। एक्सपर्ट्स के अनुसार बाजार में केवल कोटे की घोषणा की नहीं बल्कि असल तेल के जहाजों की कमी है।

होर्मुज जलडमरूमध्य का संकट कब तक ठीक होने की उम्मीद है?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को उम्मीद है कि 7 सितंबर 2026 से पहले कोई समझौता हो सकता है। हालांकि, एक्सपर्ट्स का मानना है कि समझौता होने के बाद भी सामान्य सप्लाई बहाल होने में कई महीने लग सकते हैं।