ओपेक प्लस (OPEC+) गठबंधन ने दुनिया भर में ऊर्जा की सप्लाई को बिना किसी रुकावट के जारी रखने के लिए समुद्री रास्तों की सुरक्षा को सबसे जरूरी बताया है। सऊदी अरब की तरफ से जारी जानकारी के अनुसार, 5 अप्रैल 2026 को इस बात पर सहमति बनी है कि समुद्री मकरों की सुरक्षा करना अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी है। इस फैसले का सीधा असर खाड़ी देशों में रहने वाले लोगों और वहां से तेल आयात करने वाले भारत जैसे देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।

ओपेक प्लस मीटिंग और तेल उत्पादन पर क्या है अपडेट?

रविवार 5 अप्रैल 2026 को हुई चर्चा में ओपेक प्लस के सदस्य देशों ने तेल उत्पादन में बढ़ोतरी करने की संभावनाओं पर विचार किया है। यह कदम तब उठाया जा रहा है जब होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे महत्वपूर्ण रास्ते युद्ध की वजह से प्रभावित हैं। अगर यह समुद्री रास्ता दोबारा खुलता है, तो प्रमुख उत्पादक देश तेल की सप्लाई बढ़ाने के लिए तैयार रहना चाहते हैं। इस गठबंधन में सऊदी अरब, रूस, यूएई, कुवैत, इराक, कजाकिस्तान, अल्जीरिया और ओमान जैसे बड़े देश शामिल हैं।

सुरक्षा और सप्लाई चेन को लेकर मुख्य बातें

सऊदी अरब ने लगातार इस बात पर जोर दिया है कि लाल सागर और उसके आसपास के बंदरगाहों के जरिए होने वाले व्यापार को सुरक्षित रखना जरूरी है। बहरीन के विदेश मंत्री ने भी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में समुद्री सुरक्षा को लेकर प्रस्ताव पेश करने की बात कही है।

  • समुद्री रास्तों की सुरक्षा से वैश्विक स्तर पर सामानों और ईंधन की कीमतें स्थिर रहेंगी।
  • सऊदी अरब अपने बंदरगाहों पर लॉजिस्टिक सप्लाई को मजबूत करने के लिए काम कर रहा है।
  • अरब लीग ने भी समुद्री यातायात पर होने वाले हमलों को रोकने की अपील की है।
  • इसका उद्देश्य खाड़ी देशों से होने वाले निर्यात और आयात को बिना किसी डर के जारी रखना है।
Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.