मिडिल ईस्ट में धीरे-धीरे शांति लौटने के बाद अब दुनिया के बड़े तेल उत्पादक देशों के समूह OPEC+ ने तेल उत्पादन बढ़ाने के संकेत दिए हैं. सात प्रमुख देश इस समय ऑनलाइन बैठक कर रहे हैं ताकि अगस्त महीने के लिए उत्पादन की सीमा तय की जा सके. इस फैसले का असर पूरी दुनिया के तेल बाजार और कीमतों पर पड़ सकता है.
UBS के विश्लेषक जियोवानी स्टौनोवो के मुताबिक, तेल उत्पादन में 188,000 बैरल प्रति दिन (bpd) की बढ़ोतरी हो सकती है. यह कदम मिडिल ईस्ट में सुधार और खासकर 2026 के ईरान युद्ध के दौरान आए ईंधन संकट से उबरने के बाद उठाया जा रहा है. इसके साथ ही Strait of Hormuz के दोबारा खुलने और ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों में ढील मिलने से तेल की सप्लाई में सुधार हुआ है.
बता दें कि 7 जून 2026 को सऊदी अरब, रूस, इराक, कुवैत, कजाकिस्तान, अल्जीरिया और ओमान जैसे सात प्रमुख देशों ने जुलाई के लिए 188,000 bpd की बढ़ोतरी का फैसला किया था. इस कदम का मकसद तेल बाजार में स्थिरता लाना था. वहीं, ईरान और वाशिंगटन के बीच 17 जून 2026 को एक समझौता हुआ था जिससे समुद्री रास्तों की बाधाएं दूर हुईं.
इराक ने अपनी वित्तीय स्थिति सुधारने के लिए उत्पादन कोटा बढ़ाने की इच्छा जताई है. इराक का जुलाई का कोटा 4.378 मिलियन bpd था, लेकिन युद्ध की वजह से उत्पादन उससे कम रहा. दूसरी तरफ, UAE ने 1 मई 2026 को OPEC की सदस्यता छोड़ दी क्योंकि वह अपनी नई उत्पादन क्षमता का पूरा इस्तेमाल करना चाहता था.
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| अगस्त उत्पादन वृद्धि (अनुमानित) | 188,000 bpd |
| जुलाई उत्पादन वृद्धि (तय) | 188,000 bpd |
| इराक का जुलाई कोटा | 4.378 मिलियन bpd |
| UAE का OPEC से अलग होना | 1 मई 2026 |
| Strait of Hormuz समझौता | 17 जून 2026 |
| मुआवज़ा अवधि की समाप्ति | दिसंबर 2026 |
| बैठक की तारीख | 5 जुलाई 2026 |
Rystad Energy के विशेषज्ञ जॉर्ज लियोन ने चेतावनी दी है कि जैसे ही Strait of Hormuz पूरी तरह खुलता है, बाजार में तेल की कमी का डर खत्म हो सकता है और जरूरत से ज्यादा तेल (surplus) होने की स्थिति बन सकती है. फिलहाल, जनवरी 2024 से ज्यादा उत्पादन करने वाले देशों के लिए मुआवज़ा अवधि को दिसंबर 2026 तक बढ़ा दिया गया है.
