पाकिस्तान ने ईरान को सामान भेजने के लिए छह नए ज़मीनी रास्ते शुरू कर दिए हैं। यह फैसला इसलिए लिया गया है ताकि हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में लगी समुद्री पाबंदियों से बचा जा सके। पाकिस्तान के वाणिज्य मंत्रालय ने 25 अप्रैल 2026 को इस संबंध में आदेश जारी किया था, जो तुरंत लागू हो गया है।

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नए रास्तों की लिस्ट और समय की बचत

इन रास्तों के ज़रिए कराची, पोर्ट कासिम और ग्वादर बंदरगाहों को ईरान के गब्द और ताफ़तान बॉर्डर से जोड़ा गया है। यह कार्गो बलूचिस्तान के तुर्बत, पंजगुर, खुज़दार, क्वेटा और दलबन्दिन जैसे शहरों से होकर गुज़रेगा।

  • ग्वादर से गब्द वाला रास्ता सबसे ज़्यादा फायदेमंद है।
  • इसमें समय घटकर केवल 2 से 3 घंटे रह जाएगा, जबकि कराची से इसमें 16 से 18 घंटे लगते थे।
  • ट्रांसपोर्ट का खर्चा भी 45 से 55 प्रतिशत तक कम होने की उम्मीद है।

नियम और भारतीय सामान पर पाबंदी

इस पूरी प्रक्रिया को “ट्रांजिट ऑफ गुड्स थ्रू टेरिटरी ऑफ पाकिस्तान ऑर्डर 2026” के तहत चलाया जा रहा है। सामान ले जाने वाले व्यापारियों को कस्टम एक्ट 1969 के हिसाब से गारंटी राशि जमा करनी होगी।

  • यह सुविधा केवल तीसरे देशों के कार्गो के लिए है जो पाकिस्तान के रास्ते ईरान जाएंगे।
  • मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए संघर्ष के बाद भारतीय सामान को इस रूट से ले जाने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।
  • करची बंदरगाह पर अभी भी करीब 3,000 कंटेनर फंसे हुए हैं।

सरकारी बयान और अमेरिका का रिएक्शन

वाणिज्य मंत्री Jam Kamal Khan ने इसे क्षेत्रीय व्यापार को बढ़ावा देने वाला एक बड़ा कदम बताया है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञ Derek J. Grossman ने कहा कि पाकिस्तान अमेरिका के दबाव को कम करने की कोशिश कर रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने इन रास्तों के बारे में जानकारी होने की बात कही, लेकिन यह साफ़ नहीं किया कि पाकिस्तान ने इस बारे में वाशिंगटन से सलाह ली थी या नहीं।

Frequently Asked Questions (FAQs)

पाकिस्तान ने ये ज़मीनी रास्ते क्यों शुरू किए?

अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों की समुद्री नाकेबंदी कर रखी है, जिसकी वजह से सामान ले जाना मुश्किल था। इससे बचने के लिए पाकिस्तान ने सड़क मार्ग का विकल्प चुना है।

क्या भारतीय सामान इन रास्तों से ईरान जा सकता है?

नहीं, मई 2025 के भारत-पाकिस्तान संघर्ष के बाद लगाए गए प्रतिबंधों के कारण भारतीय मूल के सामान को इन रास्तों से ले जाने पर पूरी तरह पाबंदी है।