पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के रावलाकोट शहर में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच गंभीर झड़पें हुई हैं। इन झड़पों में मरने वालों की संख्या बढ़कर 30 तक पहुंच गई है और लगभग 200 लोग घायल बताए जा रहे हैं। स्थानीय प्रशासन ने पूरे इलाके में मोबाइल और इंटरनेट सेवाओं को बंद कर दिया है और धारा 144 लागू की है। यह बवाल एक प्रतिबंधित नागरिक समाज समूह द्वारा बुलाई गई हड़ताल के बाद शुरू हुआ।

क्यों भड़की कश्मीर के इस हिस्से में इतनी बड़ी हिंसा?

यह पूरा विवाद ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के नेतृत्व में शुरू हुआ था। यह संगठन व्यापारियों, ट्रांसपोर्टरों, वकीलों और छात्रों का एक गठबंधन है। ये लोग बिजली दरों में कमी, आटे-गेहूं की कीमतों में सब्सिडी और शासन व्यवस्था में बदलाव की मांग कर रहे हैं। विशेष रूप से, ये भारतीय प्रशासित कश्मीर के शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटों को खत्म करने की मांग पर अड़े हुए हैं। आजाद जम्मू और कश्मीर सरकार ने इस समूह को आतंकवाद विरोधी अधिनियम के तहत पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया है।

सरकार ने क्या की है सख्त कार्रवाई और क्या हैं ताजा हालात?

क्षेत्र की सरकार ने कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए सख्त कदम उठाए हैं और कई बड़े फैसले लिए हैं:

  • रावलाकोट और मुजफ्फराबाद में धारा 144 लागू की गई है ताकि भीड़ जमा न हो सके।
  • पूरे क्षेत्र में इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं पूरी तरह से निलंबित कर दी गई हैं।
  • चार प्रमुख JAAC नेताओं के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज किया गया है और उनकी गिरफ्तारी पर 1 करोड़ पाकिस्तानी रुपये का इनाम घोषित किया गया है।
  • पुलिस प्रमुख लियाकत अली मलिक ने बताया कि इन झड़पों में 23 सुरक्षाकर्मी और लगभग 50 प्रदर्शनकारी घायल हुए हैं और कई लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

मानवाधिकार संगठनों और सरकार का क्या रुख है?

एमनेस्टी इंटरनेशनल जैसे मानवाधिकार संगठनों ने इस कड़ी कार्रवाई की आलोचना की है। उन्होंने इंटरनेट बंद करने, बड़े पैमाने पर की जा रही गिरफ्तारियों और बल प्रयोग पर चिंता जताई है। दूसरी ओर, क्षेत्र के प्रधानमंत्री फैसल मुमताज राठौर ने बातचीत की इच्छा जताई है, लेकिन उन्होंने शरणार्थी सीटों को खत्म करने को लेकर संवैधानिक सीमाओं का हवाला दिया है। पूंछ डिवीजन के कमिश्नर सरदार वाheed खान ने पुष्टि की है कि स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा था।

Frequently Asked Questions (FAQs)

प्रदर्शनकारी सरकार से क्या मुख्य मांगें कर रहे हैं?

प्रदर्शनकारी मुख्य रूप से बिजली दरों में कमी, गेहूं पर सब्सिडी और शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 विधायी सीटों को समाप्त करने की मांग कर रहे हैं।

इस झड़प में अब तक कितने लोगों की जान जा चुकी है?

शुरुआती रिपोर्टों में 11 लोगों की मौत की खबर थी, लेकिन ताजा अपडेट के अनुसार मरने वालों की कुल संख्या बढ़कर कम से कम 30 हो गई है और लगभग 200 लोग घायल हैं।

Sushma Kumari

Shushma covers Stories Around Expats and Helpful Contents Related to Daily life of Public. She completed Mass Communication Degree From Makhan lal Chaturvedi College Bhopal and Has 3 years of Field Experience. Earlier She Worked with Jagran Media Patna Office and Now Working with GulfHindi.com