पाकिस्तान का कृषि क्षेत्र इन दिनों बड़ी मुश्किलों से गुजर रहा है। OICCI की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, खराब नीतियों और देरी से लिए गए फैसलों के कारण देश को हर साल 2 से 3 अरब डॉलर का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। कपास का उत्पादन जो कभी 14 मिलियन गांठ के स्तर पर था, वह अब घटकर 6.85 मिलियन गांठ रह गया है। यह सरकारी लक्ष्य 10 मिलियन गांठ से भी काफी कम है।
नुकसान की मुख्य वजहें
खेती के इस खराब प्रदर्शन के पीछे मौसम में बदलाव, कीटों का हमला और घटिया बीज जैसे कारण शामिल हैं। इसके अलावा, बिना किसी ठोस वैज्ञानिक योजना के कीटनाशकों पर लगाई गई पाबंदियों ने भी किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। हालांकि, जून 2026 में सरकार ने नेशनल एग्रीकल्चर बायोटेक्नोलॉजी पॉलिसी 2025 को मंजूरी दे दी है, लेकिन इसका फायदा अभी तक जमीन पर नहीं दिख रहा है। अगर यह नीति पूरी तरह लागू होती है, तो अकेले मक्के के निर्यात से ही 1 अरब डॉलर की अतिरिक्त कमाई हो सकती है।
सुधार की सख्त जरूरत
OICCI के सेक्रेटरी जनरल M. Abdul Aleem का कहना है कि निवेश का भरोसा तभी बढ़ेगा जब नई बायोटेक्नोलॉजी नीति को वास्तव में लागू किया जाएगा। फेडरल मिनिस्टर Rana Tanveer Hussain और Pakistan Agricultural Research Council के चेयरमैन Dr. Syed Murtaza Hassan Andrabi ने भी कृषि अनुसंधान में आधुनिक बदलावों की जरूरत पर जोर दिया है। पाकिस्तान के लिए कपास उत्पादन को 8 से 9 मिलियन गांठ तक वापस लाना बहुत जरूरी है, क्योंकि देश का टेक्सटाइल सेक्टर कुल निर्यात का लगभग 60 फीसदी हिस्सा है और इससे विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ रहा दबाव भी कम होगा।
