Pakistan Human Rights Report: पाकिस्तान में नागरिक अधिकारों की भारी गिरावट, एमनेस्टी इंटरनेशनल ने जताई गहरी चिंता
Amnesty International ने अपनी नई रिपोर्ट में पाकिस्तान के हालात पर गंभीर सवाल उठाए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक वहां आम लोगों की आजादी और नागरिक अधिकारों में भारी कमी आई है. मानवाधिकार संस्था ने चेतावनी दी है कि पूरी दुनिया में बुनियादी आजादी खतरे में है और पाकिस्तान में यह स्थिति और भी ज्यादा खराब नजर आ रही है.
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पाकिस्तान में कौन से नियम लोगों की आजादी छीन रहे हैं?
सरकार ने कई ऐसे कानून लागू किए हैं जिनसे लोगों की आवाज दबाई जा रही है. साइबर कानून, आतंकवाद विरोधी कानून और ऑनलाइन बोलने के नियमों ने विरोध प्रदर्शनों और अभिव्यक्ति की आजादी को सीमित कर दिया है. 27वें संशोधन के जरिए न्यायपालिका की ताकत कम की गई है और बड़े अधिकारियों को ज्यादा छूट दी गई है.
इसके अलावा, पंजाब डिफेमेशन एक्ट और पब्लिक ऑर्डर एक्ट जैसे कानूनों से आम जनता और पत्रकारों पर दबाव बढ़ा है. सरकार Section 144 का इस्तेमाल करके सार्वजनिक विरोध प्रदर्शनों पर पूरी तरह रोक लगा देती है.
किन लोगों और समूहों पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है?
रिपोर्ट में बताया गया है कि पत्रकारों, कार्यकर्ताओं और राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाया जा रहा है. PTI पार्टी के सदस्य और इमरान खान लंबे समय से जेल में हैं और उन पर राजनीतिक आरोप लगाए गए हैं. बलूच कार्यकर्ताओं के प्रदर्शनों को बलपूर्वक रोका गया, जिसमें मार्च के एक प्रदर्शन के दौरान तीन लोगों की जान चली गई.
धार्मिक अल्पसंख्यकों, खासकर अहमदिया समुदाय के लोग भी मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं. उनके इबादतगाहों पर हमले हुए और कई लोगों को ब्लास्फेमी कानूनों के तहत गिरफ्तार किया गया.
मानवाधिकारों पर असर डालने वाले मुख्य कानून और कदम
| कानून/संस्था | असर और प्रभाव |
|---|---|
| 27वां संशोधन | न्यायपालिका की आजादी कम हुई, नेतृत्व को छूट मिली |
| Peaceful Assembly Act 2024 | इस्लामाबाद में सभाओं पर प्रतिबंध लगाने की शक्ति |
| Punjab Defamation Act 2024 | फ्री स्पीच या बोलने की आजादी में कटौती |
| PECA और एंटी-टेरर एक्ट | पत्रकारों और एक्टिविस्ट्स को टारगेट करना |
| Section 144 | सार्वजनिक विरोध प्रदर्शनों पर पाबंदी |
| PTA (टेलीकॉम अथॉरिटी) | इंटरनेट शटडाउन और ऑनलाइन सेंसरशिप |
| चीन की तकनीक | वेब मॉनिटरिंग सिस्टम को अपडेट किया गया |
रिपोर्ट में यह भी बात सामने आई है कि सरकार उन मीडिया हाउस पर आर्थिक दबाव बना रही है जो सरकार की आलोचना करते हैं. उनके विज्ञापन वापस ले लिए जाते हैं ताकि वे खबर चलाने से डरें. इंटरनेट बंद करना और निगरानी रखना अब आम बात हो गई है.