अमेरिका और ईरान के बीच चल रही जंग को रोकने के लिए पाकिस्तान ने बड़ी भूमिका निभाई है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने आधिकारिक तौर पर बताया है कि दोनों देशों के बीच शांति समझौते का फाइनल टेक्स्ट तैयार हो गया है. इस खबर से पूरी दुनिया में उम्मीद जगी है कि युद्ध खत्म होगा और ऊर्जा की कीमतों में कमी आएगी.

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पाकिस्तान और अमेरिका का क्या कहना है

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी दी कि शांति अब पहले से कहीं ज्यादा करीब है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान इस समझौते को लागू करने के लिए दोनों देशों के साथ मिलकर काम कर रहा है. उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि इस समझौते को रोकने के लिए कुछ लोग गलत जानकारी फैला रहे हैं.

दूसरी तरफ, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 11 जून को कहा था कि ईरान के साथ युद्ध खत्म करने का समझौता हो गया है. लेकिन 12 जून को ट्रंप ने ईरानी मीडिया की बातों को गलत बताया और कहा कि ईरान के साथ व्यवहार करना मुश्किल है. उन्होंने ईरान पर भारतीय जहाजों पर ड्रोन हमले का आरोप भी लगाया. अमेरिका के उपराष्ट्रपति JD Vance ने साफ कर दिया कि इस समझौते के बदले ईरान को कोई नगद पैसा नहीं दिया जाएगा और आर्थिक फायदे तभी मिलेंगे जब ईरान अपनी शर्तें पूरी करेगा.

ईरान की प्रतिक्रिया और आपसी मतभेद

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि अमेरिका के साथ समझौता अब बहुत करीब है. उन्होंने मीडिया से अपील की कि जब तक फाइनल फैसला न हो जाए, तब तक अटकलें न लगाएं. वहीं, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाक़ई ने कहा कि अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है. उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका बार-बार अपनी शर्तें बदल रहा है और नई मांगें रख रहा है.

समझौते की संभावित शर्तें और असर

मीडिया रिपोर्ट्स और लीक हुई जानकारी के मुताबिक, इस समझौते में कुछ अहम बातें शामिल हो सकती हैं:

  • 60 दिनों के लिए युद्ध विराम को आगे बढ़ाना.
  • हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलना.
  • ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों को हटाना.
  • ईरान के परमाणु कार्यक्रम और यूरेनियम के मुद्दे पर चर्चा करना.
  • ईरान से परमाणु सामग्री को हटाकर उसे नष्ट करना.

यह जंग 28 फरवरी से शुरू हुई थी, जिसकी वजह से दुनिया भर में तेल और गैस की कीमतें बहुत बढ़ गई थीं. अगर यह समझौता लागू होता है, तो इसका सीधा फायदा आम लोगों को मिलेगा क्योंकि ग्लोबल मार्केट में तेल के दाम गिर सकते हैं. चर्चा है कि इस समझौते पर हस्ताक्षर जेनेवा में हो सकते हैं, हालांकि ईरानी सूत्रों ने अभी इसकी पुष्टि नहीं की है.