अमेरिका, इसराइल और ईरान के बीच चल रहे बड़े सैन्य तनाव को शांत करने के लिए पाकिस्तान ने एक बार फिर बड़ी पहल की है। पाकिस्तान के आर्मी चीफ फील्ड मार्शल Asim Munir शुक्रवार को ईरान की राजधानी तेहरान पहुंचे हैं। वह दोनों पक्षों के बीच चल रही जंग को समाप्त करने और मध्यस्थता प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए वहां गए हैं। पाकिस्तान इस समय दोनों देशों के बीच बातचीत कराने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
पाकिस्तान के आर्मी चीफ क्यों पहुंचे ईरान?
पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल Asim Munir शुक्रवार, 22 मई 2026 को तेहरान पहुंचे, जहां ईरान के आंतरिक मंत्री Eskandar Momeni ने उनका स्वागत किया। इस बैठक में पाकिस्तान के गृह मंत्री Mohsin Naqvi भी मौजूद थे, जो पिछले दो दिनों से तेहरान में रहकर अमेरिका और ईरान के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत का हिस्सा बने हुए हैं। पाकिस्तान का लक्ष्य दोनों देशों के बीच बातचीत के जरिए एक सुरक्षित और शांतिपूर्ण समझौता कराना है।
वार्ता पर अमेरिका और ईरान का क्या है रुख?
अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने इस शांति वार्ता में थोड़ी प्रगति की बात स्वीकार की है और पाकिस्तान की भूमिका की तारीफ की है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने भी बातचीत जारी रहने के कारण अभी सैन्य हमलों को रोक रखा है। वहीं दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने पाकिस्तानी अधिकारियों के साथ बातचीत की है, लेकिन अमेरिकी शर्तों और ईरान की मांगों के बीच अभी भी बड़ा अंतर बना हुआ है। ईरान भविष्य में अमेरिकी हमलों से सुरक्षा की पूरी गारंटी चाहता है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य और प्रतिबंधों का खतरा
इस जंग की शुरुआत 28 फरवरी 2026 को हुई थी, जिसके बाद अप्रैल में एक अस्थायी युद्धविराम लागू हुआ था। वर्तमान में यूरोपीय संघ उन ईरानी अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रहा है जो हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के रास्ते को रोकने के लिए जिम्मेदार हैं। कतर की टीम भी बातचीत के लिए तेहरान में मौजूद है, जबकि सऊदी अरब, चीन, तुर्की और मिस्र जैसी क्षेत्रीय ताकतें भी पाकिस्तान के इस शांति प्रयास का समर्थन कर रही हैं।
Frequently Asked Questions (FAQs)
पाकिस्तान के आर्मी चीफ तेहरान क्यों गए हैं?
फील्ड मार्शल Asim Munir ईरान और अमेरिका-इसराइल के बीच जारी युद्ध को रोकने और दोनों देशों के बीच मध्यस्थता वार्ता को सफल बनाने के लिए तेहरान गए हैं।
इस शांति वार्ता पर अमेरिका की क्या प्रतिक्रिया है?
अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने बातचीत में मामूली प्रगति की पुष्टि की है और मध्यस्थ के रूप में पाकिस्तान की भूमिका की सराहना की है।
