पाकिस्तान की एक अदालत ने बलूच नेताओं डॉ महरंग बलोच और सिबगत उल्लाह शाह जी को उम्रकैद की सजा सुनाई है। इस फैसले के बाद एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कड़ा विरोध जताया है। मानवाधिकार संस्था का कहना है कि यह फैसला निष्पक्ष सुनवाई के नियमों के खिलाफ है।

क्वेटा की एंटी-टेररिज्म कोर्ट ने 22 जून 2026 को यह फैसला सुनाया। इसके अगले ही दिन 23 जून को एमनेस्टी इंटरनेशनल ने अपनी प्रतिक्रिया दी। इन नेताओं को पाकिस्तान दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) और एंटी-टेररिज्म एक्ट 1997 की धारा 7 के तहत दोषी ठहराया गया। एमनेस्टी का आरोप है कि पाकिस्तान सरकार शांतिपूर्ण विरोध को दबाने के लिए आतंकवाद विरोधी कानूनों का गलत इस्तेमाल कर रही है।

क्या था पूरा मामला

यह मामला जुलाई 2024 का है जब ग्वादर में ‘बलूच राजी माची’ (बलूच नेशनल गैदरिंग) के दौरान एक फ्रंटियर कोर (FC) अधिकारी की मौत हो गई थी। कोर्ट ने यह फैसला दिया कि डॉ महरंग बलोच और सिबगत उल्लाह शाह जी इस विरोध प्रदर्शन में सक्रिय रूप से शामिल थे और उनकी मंशा हत्या की थी, इसलिए वे आतंकवाद और हत्या के अपराधों के लिए जिम्मेदार हैं।

सुनवाई और गिरफ्तारी पर सवाल

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने बताया कि यह सुनवाई जेल के अंदर बहुत गुप्त तरीके से की गई। संस्था का कहना है कि हिंसा और इन नेताओं के बीच कोई सीधा सबूत पेश नहीं किया गया। महरंग बलोच और सिबगत उल्लाह शाह जी ने इस सुनवाई का बहिष्कार किया था। उनका कहना था कि जज पक्षपाती हैं और उन्हें अपना पक्ष रखने का सही मौका नहीं दिया गया। महरंग बलोच को मार्च 2025 में एक शांतिपूर्ण धरने के बाद गिरफ्तार किया गया था और उन पर कई मामले दर्ज किए गए थे।

नेताओं और अधिकारियों के बयान

  • इसाबेल लासी (एमनेस्टी इंटरनेशनल): उन्होंने कहा कि यह फैसला निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार का अपमान है। उन्होंने मांग की कि इन दोनों को तुरंत रिहा किया जाए और सभी आरोप हटाए जाएं।
  • सरफराज बुगती (मुख्यमंत्री बलूचिस्तान): उन्होंने कोर्ट के फैसले का स्वागत किया और कहा कि न्याय हुआ है।
  • शाहिद रिंड (सरकारी प्रवक्ता): उन्होंने साफ किया कि यह मामला एक सैनिक की हत्या का है और इसका राजनीति या शांतिपूर्ण विरोध से कोई संबंध नहीं है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिक्रिया

बलूच अमेरिकन कांग्रेस के अध्यक्ष तारा चंद ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को पत्र लिखकर इस फैसले पर गहरी चिंता जताई। वहीं, बलूच नेशनल मूवमेंट के अध्यक्ष नसीम बलोच ने संयुक्त राष्ट्र के विशेष प्रतिनिधियों से मुलाकात कर इस अन्यायपूर्ण सुनवाई का मुद्दा उठाया।

बलूच यकजेहती कमेटी (BYC) खुद को एक शांतिपूर्ण नागरिक अधिकार आंदोलन बताती है जो जबरन गायब किए गए लोगों और आर्थिक अन्याय के खिलाफ लड़ रहा है। हालांकि, पाकिस्तानी अधिकारियों का दावा है कि इस कमेटी के संबंध प्रतिबंधित बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) से हैं।