पाकिस्तान सरकार ने साल 2026-27 के लिए अपना नया बजट पेश किया है, लेकिन इसे लेकर देश में काफी गुस्सा है। अर्थशास्त्रियों और आम लोगों का कहना है कि इस बजट में अमीरों के बजाय गरीबों और मध्यम वर्ग की जेब पर वार किया गया है। सरकार ने आर्थिक स्थिरता की बात तो की है, लेकिन इसकी कीमत आम जनता को चुकानी पड़ रही है।

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बजट को लेकर क्यों मचा है बवाल

यह बजट 10 जून 2026 को पेश किया गया था और 23 जून 2026 को नेशनल असेंबली ने इसे पास कर दिया। आलोचकों का कहना है कि सरकार ने अपनी अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए सारा बोझ कम आय वाले परिवारों पर डाल दिया है। शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण जैसे जरूरी कामों के लिए सरकारी खर्च कम कर दिया गया है, जिससे गरीब और गरीब होता जाएगा।

टैक्स और खर्च का पूरा हिसाब

विवरण जानकारी
बजट पेश होने की तारीख 10 जून 2026
फाइनेंस बिल पास होने की तारीख 23 जून 2026
टैक्स नेट में शामिल दुकानदार करीब 35 लाख
टैक्स में छूट गर्भनिरोधक और मासिक धर्म स्वच्छता उत्पादों पर GST खत्म
नए टैक्स डिजिटल इनकम और सोशल मीडिया कमाई पर नए लेवी
बजट आवंटन डिफेंस बजट बढ़ा, विकास खर्च घटाया गया
मुख्य प्रभाव कम आय वाले लोगों और वेतनभोगी कर्मचारियों पर दबाव

विशेषज्ञों और नेताओं की राय

अर्थशास्त्री Fahd Ali ने कहा कि सामाजिक क्षेत्रों में खर्च कम करने से देश में असमानता बढ़ेगी। वहीं Hadia Majid का मानना है कि महिलाओं के लिए किए गए दावे सिर्फ कहने की बातें हैं, क्योंकि असल में उन्हें कोई बड़ा फायदा नहीं होगा। लेबर लीडर Rubina Jamil ने सरकार की इस बात के लिए आलोचना की कि बजट बनाने में मजदूरों से कोई सलाह नहीं ली गई।

राजनीतिक पार्टियों में भी इस पर नाराजगी है। PTI ने इसे ‘गरीब विरोधी’ और अमीरों को बचाने वाला बजट बताया। PPP की सदस्य Natasha Daultana ने कहा कि यह बजट जनता की जरूरतों के बजाय IMF की शर्तों को पूरा करने के लिए बनाया गया है।

सीनेट की सिफारिशें

सीनेट ने बजट में कुछ बदलावों के सुझाव दिए थे, जिनमें कम आय वालों के लिए इनकम टैक्स की सीमा बढ़ाना, वेतनभोगी लोगों का टैक्स कम करना और जरूरी खाने-पीने की चीजों व दवाइयों पर GST घटाना शामिल था। हालांकि, इन सिफारिशों का मानना बाध्यकारी नहीं था।

आम जनता में इस बात को लेकर भारी गुस्सा है कि महंगाई और बिजली के बिल पहले से ही आसमान छू रहे हैं और अब नए बजट ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। लोगों का कहना है कि उनकी तनख्वाह वहीं की वहीं है, लेकिन घर चलाने का खर्चा बहुत बढ़ गया है।