पाकिस्तान में नया बजट पेश होने जा रहा है और आम जनता काफी परेशान है। बढ़ती महंगाई और IMF की सख्त शर्तों के बीच सरकार को अब टैक्स बढ़ाने और खर्चों में कटौती करने पर मजबूर होना पड़ रहा है। इस बजट का सीधा असर मध्यम वर्ग और सैलरी पाने वाले लोगों की जेब पर पड़ेगा क्योंकि सरकार अब अपनी कमाई बढ़ाने के लिए नए रास्ते खोज रही है।

बजट 2026-27 के मुख्य आंकड़े

वित्त मंत्री Muhammad Aurangzeb ने नए साल के लिए बजट पेश किया है। इसमें सरकार ने कमाई के बड़े लक्ष्य रखे हैं और खर्चों को कम करने की कोशिश की है। बजट से जुड़ी अहम जानकारी नीचे दी गई टेबल में देखी जा सकती है।

विवरण आंकड़ा/लक्ष्य
कुल बजट खर्च (Outlay) 17.5 ट्रिलियन रुपये
टैक्स वसूली का लक्ष्य (FBR) 15.267 ट्रिलियन रुपये
जीडीपी (GDP) ग्रोथ टारगेट 4% से 4.1%
महंगाई का लक्ष्य 8.2%
राष्ट्रीय विकास बजट 3,669 बिलियन रुपये
फेडरल PSDP बजट 1 ट्रिलियन रुपये
खेल बजट 1.5 बिलियन रुपये

IMF की शर्तें और टैक्स का बोझ

इस बजट पर International Monetary Fund (IMF) का गहरा असर दिख रहा है। IMF चाहता है कि पाकिस्तान अपने टैक्स सिस्टम को सुधारे और टैक्स देने वालों की संख्या बढ़ाए। चर्चा है कि IMF ने जनरल सेल्स टैक्स (GST) की दर को एक समान 19% रखने की सलाह दी है। सरकार अब टैक्स नेट को बड़ा करने और सरकारी खर्चों में सुधार करने पर जोर दे रही है ताकि कर्ज चुकाया जा सके।

विकास कार्यों और बजट में कटौती

National Economic Council (NEC) ने विकास कार्यों के बजट में करीब एक चौथाई की कटौती की है। अब कुल विकास बजट को घटाकर 3.218 ट्रिलियन रुपये कर दिया गया है। सबसे ज्यादा कटौती पंजाब प्रांत के विकास प्लान में हुई है। इसके अलावा, खेल क्षेत्र के लिए बहुत कम पैसा आवंटित किया गया है, जिससे नए प्रोजेक्ट्स में दिक्कत आ सकती है।

अर्थव्यवस्था की ताजा स्थिति

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पिछले साल 3.7% की दर से बढ़ी, जो कि तय लक्ष्य 4% से कम थी। हालांकि, अर्थव्यवस्था का कुल आकार बढ़कर 452.1 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। जुलाई से मई के बीच औसत महंगाई दर घटकर 6.7% पर आ गई है। वहीं, विदेशी मुद्रा भंडार 17.1 बिलियन डॉलर है, जिसके जून के अंत तक 18 बिलियन डॉलर होने की उम्मीद है। विदेशों में रहने वाले पाकिस्तानियों ने भी रिकॉर्ड 33.9 बिलियन डॉलर की रकम अपने देश भेजी है।

आम जनता पर असर

ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव की वजह से दुनिया भर में तेल की कीमतें बढ़ी हैं, जिसका असर पाकिस्तान में भी महंगाई के रूप में दिख रहा है। बजट में मध्यम वर्ग और वेतनभोगी कर्मचारियों पर अधिक टैक्स लगाए जाने की आशंका है। हालांकि, सरकार कम आय वाले परिवारों के लिए कैश ट्रांसफर जैसे सामाजिक सुरक्षा उपायों और सरकारी कर्मचारियों की सैलरी में मामूली बढ़ोतरी की योजना बना रही है।