POJK अशांति पर पाकिस्तान के रक्षा मंत्री का विवादित बयान, प्रदर्शनकारियों को बताया भारत का दुश्मन

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ का एक ताजा बयान इस समय चर्चा का केंद्र बना हुआ है। उन्होंने पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (POJK) में चल रहे विरोध प्रदर्शनों को लेकर एक विवादित टिप्पणी की है, जिसमें उन्होंने प्रदर्शनकारियों की तुलना भारत से करते हुए उन्हें देश का दुश्मन करार दिया। इस बयान के बाद इलाके की राजनीतिक स्थिति में और अधिक तनाव बढ़ने के संकेत मिले हैं।
प्रदर्शनकारियों पर सख्त रुख के संकेत
सोशल मीडिया पर एक वीडियो काफी तेजी से फैल रहा है, जिसमें ख्वाजा आसिफ प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बेहद सख्त भाषा का उपयोग करते सुनाई दे रहे हैं। जानकारों का कहना है कि सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री द्वारा इस तरह की तुलना करने से साफ होता है कि प्रशासन आने वाले समय में आंदोलन को दबाने के लिए अधिक कठोर कदम उठा सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, रावलाकोट और अन्य क्षेत्रों में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई झड़पों के बाद से ही माहौल काफी तनावपूर्ण है।
आंदोलन और मांग का इतिहास
यह विरोध प्रदर्शन साल 2023 में गठित की गई जॉइंट आवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के नेतृत्व में किए जा रहे हैं। इन प्रदर्शनों की शुरुआत मुख्य रूप से महंगी बिजली के बिलों और गेहूं की कीमतों में भारी उछाल के विरोध में हुई थी। लेकिन धीरे-धीरे यह आंदोलन अब सरकार की नीतियों और चुनावी सुधारों की मांग तक पहुंच गया है। प्रदर्शनकारियों का एक मुख्य मुद्दा विधानसभा में शरणार्थियों के लिए आरक्षित सीटों की मौजूदा व्यवस्था को समाप्त करना भी है।
हिंसा और संचार पर प्रतिबंध
द डिप्लोमैट में प्रकाशित एक विश्लेषण के अनुसार, बीते 27 जुलाई को रावलाकोट से मुजफ्फराबाद की तरफ बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हिंसक टकराव हुआ। इस घटना में कम से कम 21 लोगों की जान जाने और कई लोगों के घायल होने का दावा किया गया है। हालांकि, इन आंकड़ों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना मुश्किल है, क्योंकि उस दौरान इलाके में संचार सेवाओं पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए गए थे, जिससे बाहरी दुनिया तक सही जानकारी पहुंचना कठिन हो गया था।
विस्तार लेता विरोध
विरोध प्रदर्शन अब केवल रावलाकोट तक ही सीमित नहीं रहे, बल्कि इनका दायरा बढ़कर मुजफ्फराबाद और मीरपुर जैसे बड़े क्षेत्रों तक फैल चुका है। यदि यह आंदोलन भविष्य में और अधिक व्यापक रूप लेता है, तो पाकिस्तान सरकार के लिए राजनीतिक चुनौतियां कहीं ज्यादा जटिल हो सकती हैं। फिलहाल पाकिस्तान सरकार की ओर से इन तमाम दावों या मंत्री के बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।