अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव को कम करने के लिए पाकिस्तान एक बार फिर बीच-बचाव कर रहा है. खबर है कि पाकिस्तान का एक बड़ा दल 15 या 16 अप्रैल को तेहरान पहुंचेगा. इस मुलाकात का मुख्य मकसद दोनों देशों के बीच युद्ध रोकना और शांति समझौता कराना है. दुनिया की नजरें अब इस दौरे पर टिकी हैं क्योंकि क्षेत्र में तनाव काफी बढ़ गया है.
क्या है इस दौरे का मुख्य मकसद और ताजा स्थिति?
ईरान और अमेरिका के बीच संदेशों का आदान-प्रदान जारी है, जिसमें पाकिस्तान एक सेतु का काम कर रहा है. फिलहाल 8 अप्रैल से लागू एक छोटा युद्धविराम चल रहा है जो 22 अप्रैल को खत्म होगा. क्षेत्रीय अधिकारियों के मुताबिक, इस युद्धविराम को कम से कम दो हफ्ते और बढ़ाने पर दोनों पक्ष मोटे तौर पर सहमत दिख रहे हैं. इसी समझौते को अंतिम रूप देने के लिए पाकिस्तानी दल तेहरान जा रहा है.
ईरान और अमेरिका के बड़े नेताओं ने क्या कहा?
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बग़ाई ने बताया कि अमेरिका के साथ बातचीत चल रही है और यूरेनियम संवर्धन जैसे मुद्दों पर चर्चा की जा सकती है. दूसरी तरफ, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि हालांकि वह अभी युद्धविराम बढ़ाने के बारे में नहीं सोच रहे, लेकिन एक समझौता ही सबसे अच्छा रास्ता है. उन्होंने यह भी माना कि ईरान के साथ यह युद्ध अब अपने अंत के करीब है.
इस विवाद और मध्यस्थता में कौन-कौन से देश शामिल हैं?
इस पूरी प्रक्रिया में कई देशों की भूमिका अहम रही है और अलग-अलग स्तर पर बातचीत हुई है.
| देश | भूमिका और स्थिति |
|---|---|
| पाकिस्तान | मुख्य मध्यस्थ के रूप में काम कर रहा है |
| ईरान | पाकिस्तान के जरिए अमेरिका से संपर्क में है |
| अमेरिका | पाकिस्तान की मदद से ईरान से बातचीत कर रहा है |
| सऊदी अरब और चीन | पिछले दौर की बातचीत में शामिल हुए थे |
| लेबनान | युद्धविराम समझौते में शामिल होने की मांग की है |
