पाकिस्तान के नूर खान एयरबेस को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हुआ है। अमेरिकी मीडिया हाउस CBS News ने दावा किया था कि पाकिस्तान ने ईरान के सैन्य विमानों को अपने एयरबेस का इस्तेमाल करने की इजाजत दी है। हालांकि, पाकिस्तान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इन सभी बातों को पूरी तरह गलत बताया है।
पाकिस्तान ने अमेरिकी दावों को क्यों नकारा?
पाकिस्तान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने CBS News को जवाब देते हुए कहा कि नूर खान एयरबेस शहर के बिल्कुल बीचों-बीच स्थित है। अधिकारी के मुताबिक, इतने बड़े एयरबेस पर विमानों के बड़े बेड़े को आम जनता की नजरों से छिपाकर रखना मुमकिन नहीं है। इसी वजह से उन्होंने उन रिपोर्टों को खारिज कर दिया जिनमें ईरानी विमानों की मौजूदगी की बात कही गई थी।
क्या थे अमेरिका के आरोप और क्या है पूरा मामला?
अमेरिका के कुछ अधिकारियों ने CBS News को बताया था कि पाकिस्तान ने चुपके से ईरान को अपने एयरफील्ड इस्तेमाल करने दिए। आरोप था कि ईरान ने अपने सैन्य विमानों, जिनमें एक RC-130 टोही विमान भी शामिल था, को अमेरिकी हवाई हमलों से बचाने के लिए पाकिस्तान भेजा था। यह सब अप्रैल 2026 में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ युद्धविराम की घोषणा के बाद हुआ। इसी दौरान यह भी खबर आई कि ईरान ने अफगानिस्तान में नागरिक विमान भेजे हैं, लेकिन तालिबान प्रवक्ता ज़बीहुल्लाह मुजाहिद ने अफगानिस्तान में किसी भी ईरानी विमान की मौजूदगी से इनकार किया था।
शांति वार्ता और नूर खान एयरबेस का कनेक्शन
यह पूरा विवाद 28 फरवरी 2026 को शुरू हुए ईरान युद्ध के बीच सामने आया है। पाकिस्तान इस युद्ध में तटस्थ रहा और अमेरिका और ईरान के बीच शांति कराने की कोशिश कर रहा था। इसी सिलसिले में 10 और 11 अप्रैल 2026 को इस्लामाबाद में शांति वार्ता हुई थी। इस मीटिंग के लिए ईरान के विदेश मंत्री और संसद अध्यक्ष का प्रतिनिधिमंडल 11 अप्रैल को नूर खान एयरबेस पहुंचा था, जिन्हें पाकिस्तान एयर फोर्स के जेट विमानों ने एस्कॉर्ट किया था। इसके अलावा, शांति वार्ता के सिलसिले में अमेरिकी वायु सेना के ट्रांसपोर्ट विमान भी नूर खान एयरबेस पर उतरते हुए देखे गए थे।
Frequently Asked Questions (FAQs)
क्या पाकिस्तान ने ईरानी विमानों को अपने एयरबेस पर जगह दी?
नहीं, पाकिस्तान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इन दावों को खारिज कर दिया है और कहा है कि एयरबेस शहर के बीच में होने के कारण वहां कुछ भी छिपाना संभव नहीं है।
यह विवाद किस युद्ध के संदर्भ में है?
यह मामला 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इसराइल द्वारा ईरान पर किए गए हवाई हमलों के बाद शुरू हुए 2026 के ईरान युद्ध से जुड़ा है।
