मिडल ईस्ट में बढ़ते तनाव को कम करने के लिए पाकिस्तान ने मोर्चा संभाल लिया है. अमेरिका और ईरान के बीच शांति कराने के लिए पाकिस्तान कई देशों के साथ मिलकर काम कर रहा है. इस कोशिश का मुख्य उद्देश्य इलाके में स्थिरता लाना और युद्ध की आशंका को खत्म करना है.
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पाकिस्तान ने शांति के लिए क्या कदम उठाए?
पाकिस्तान ने खुद को अमेरिका और ईरान के बीच एक कड़ी बनाया है. 12 अप्रैल 2026 को इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच बातचीत हुई, जिसमें अमेरिका के उपराष्ट्रपति JD Vance और ईरान के संसद स्पीकर मोहम्मद बागेर कालिबाफ शामिल थे. हालांकि इसमें कोई औपचारिक समझौता नहीं हुआ, लेकिन विदेश मंत्री इशक डार ने दोनों पक्षों को दो हफ्ते के युद्धविराम (ceasefire) का पालन करने को कहा. इसके बाद 22 अप्रैल को इस युद्धविराम की अवधि को बढ़ा दिया गया, जिससे बातचीत के लिए और समय मिला. इस पूरी प्रक्रिया में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ फील्ड मार्शल सैयद आसिम मुनीर ने भी सक्रिय भूमिका निभाई.
दुनिया के बड़े देशों और संस्थाओं की क्या प्रतिक्रिया रही?
पाकिस्तान की इस कोशिश की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी तारीफ हुई है. संयुक्त राष्ट्र (UN) के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा कि इन बातचीत का जारी रहना बहुत जरूरी है और उन्होंने पाकिस्तान के प्रयासों की सराहना की. वहीं सऊदी अरब ने भी अमेरिका और ईरान के बीच हुए युद्धविराम का स्वागत किया और इस डील को करवाने में पाकिस्तान की भूमिका की तारीफ की. पाकिस्तान ने शांति के लिए कतर, जर्मनी और ऑस्ट्रिया जैसे देशों से भी संपर्क साधा है.
Frequently Asked Questions (FAQs)
क्या अमेरिका और ईरान के बीच कोई औपचारिक समझौता हुआ है?
अभी तक कोई औपचारिक समझौता नहीं हुआ है, लेकिन 22 अप्रैल 2026 को युद्धविराम की अवधि बढ़ा दी गई है ताकि बातचीत जारी रह सके.
इस शांति पहल में पाकिस्तान के कौन से बड़े नेता शामिल थे?
इस कोशिश में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, विदेश मंत्री इशक डार और चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ फील्ड मार्शल सैयद आसिम मुनीर मुख्य रूप से शामिल रहे.