Pakistan में एक बार फिर से लोग रहस्यमय तरीके से गायब हो रहे हैं. ANI News के मुताबिक Islamabad और Balochistan से कई छात्रों और आम नागरिकों के लापता होने की खबरें आई हैं. इस घटना के बाद वहां के प्रशासन पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं और लोगों में डर का माहौल है.

कौन-कौन हुए गायब और कहां हुई घटना?

Balochistan और Islamabad में कई लोगों के लापता होने की खबरें आई हैं. 17 मई 2026 को Gwadar University के Vice-Chancellor, Pro-Vice-Chancellor और दो अन्य कर्मचारी Mastung में गायब हो गए थे. इसके अलावा Washuk, Gwadar और Dera Bugti जिलों में एक किशोर छात्र, एक मछुआरा और सरकारी कर्मचारी को भी सुरक्षा बलों द्वारा हिरासत में लेने का आरोप है.

  • Saeed Baloch: 15 साल का छात्र जिसे 6 मई को Quetta से उठाया गया.
  • Khalid Aktar: 35 साल का दुकानदार जिसे 25 अप्रैल को Turbat से ले जाया गया.
  • विश्वविद्यालय अधिकारी: Gwadar University के बड़े अधिकारी जो Quetta जाते समय गायब हुए.

मानवाधिकार संगठनों और अदालतों ने क्या कहा?

Human Rights Commission of Pakistan (HRCP) ने सुरक्षा व्यवस्था बिगड़ने पर गहरी चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि लोग जबरन गायब किए जाने और टारगेट किलिंग के बीच फंसे हुए हैं. International Law के तहत यह ICCPR नियमों का उल्लंघन है. Pakistan के Supreme Court ने 2014 में इसे इंसानियत के खिलाफ अपराध माना था.

Islamabad High Court के चीफ जस्टिस Athar Minallah ने भी इस मामले में सरकार और जांच आयोग की विफलता की आलोचना की. उन्होंने कहा कि राज्य की जिम्मेदारी है कि वह लापता लोगों की जांच करे.

सरकार और सुरक्षा बलों का क्या कहना है?

सरकार ने लापता लोगों का पता लगाने के लिए 2011 में Commission of Inquiry on Enforced Disappearances (COIED) बनाया था. सुरक्षा बलों का कहना है कि वे केवल उग्रवादियों को निशाना बना रहे हैं. उनका दावा है कि कुछ लापता लोग विद्रोही समूहों में शामिल हो गए होंगे. हालांकि, मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि COIED सही ढंग से काम नहीं कर रहा है और दोषियों को सजा नहीं मिल रही है.

Frequently Asked Questions (FAQs)

पाकिस्तान में किन लोगों को निशाना बनाया जा रहा है?

हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक छात्रों, नागरिकों, एक्टिविस्ट, मछुआरों और सरकारी कर्मचारियों जैसे लोगों को निशाना बनाया जा रहा है. इसमें Gwadar University के अधिकारी भी शामिल हैं.

पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट का इस पर क्या फैसला था?

Pakistan के सुप्रीम कोर्ट ने 2014 में यह फैसला सुनाया था कि लोगों को जबरन गायब करना इंसानियत के खिलाफ एक अपराध है और यह संविधान के अनुच्छेद 10 का उल्लंघन है.