पाकिस्तान में लोगों के अचानक गायब होने के मामलों ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। कराची और हब चौकी से दो नए लोगों के कथित तौर पर गायब होने की खबर आई है, जिसके बाद मानवाधिकार संगठनों ने चिंता जाहिर की है। इस बीच, पहले से लापता दो लोग अपने परिवारों के पास वापस भी लौट आए हैं। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी इस मामले में दखल देते हुए सरकार से कार्रवाई की मांग की है।

नए मामलों में किन लोगों के गायब होने का है आरोप?

लापता हुए लोगों के परिजनों और प्रत्यक्षदर्शियों ने सुरक्षा बलों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। हाल ही में सामने आए मामलों का विवरण इस प्रकार है:

  • मोहम्मद हनीफ: केच जिले के एक 37 वर्षीय व्यवसायी मोहम्मद हनीफ को 12 फरवरी 2026 को हब चौकी के दारू होटल से कथित तौर पर हिरासत में लिया गया था। प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि उन्हें काउंटर-टेररिज्म डिपार्टमेंट (CTD) के कर्मियों ने हिरासत में लिया था और तब से उनका कोई सुराग नहीं मिला है।
  • गुलाम कादिर: 45 वर्षीय गुलाम कादिर को 31 मई 2026 की सुबह कराची के मलीर इलाके में स्थित उनके घर से कथित तौर पर उठाया गया था। रिश्तेदारों ने इसके पीछे पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों और रेंजर्स कर्मियों का हाथ होने का आरोप लगाया है।

लापता लोगों की सुरक्षित वापसी और एमनेस्टी इंटरनेशनल की अपील

इस तनावपूर्ण माहौल के बीच दो लोगों की सुरक्षित वापसी की भी खबर मिली है। बलूच स्टूडेंट्स काउंसिल मुल्तान के पूर्व चेयरमैन शोएब बंगुलजई कराची के गुलशन-ए-इकबाल से 385 दिनों तक लापता रहने के बाद अपने परिवार से सुरक्षित मिल गए हैं। वहीं, नुश्की जिले के किल्ली जमाल्दिनी निवासी उमैर अहमद सुमलानी भी करीब चार महीने बाद वापस लौट आए हैं।

दूसरी ओर, एमनेस्टी इंटरनेशनल ने 5 जून 2026 को मानवाधिकार कार्यकर्ता फौजी बलूच के भाई दाद शाह के मामले में एक जरूरी अपील जारी की है। दाद शाह को कथित तौर पर 21 अप्रैल को कराची में उनके घर से सुरक्षा बलों द्वारा उठाया गया था। संगठन ने सरकार से उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने, स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने और उन्हें तुरंत रिहा करने की मांग की है। इसके साथ ही संगठन ने मामलों की जांच के लिए 29 नवंबर 2026 तक की समयसीमा तय की है।

मामले पर सरकार और सुरक्षा एजेंसियों का पुराना रुख

पाकिस्तानी सुरक्षा एजेंसियां अक्सर इन गायब होने के आरोपों को खारिज करती रही हैं। कानून प्रवर्तन एजेंसियों का कहना है कि गायब होने वाले कई लोग या तो उग्रवादी संगठनों में शामिल हो जाते हैं या फिर अवैध तरीके से दूसरे देशों में चले जाते हैं। पाकिस्तान सरकार ने साल 2011 में लापता लोगों की जांच के लिए एक विशेष जांच आयोग का गठन किया था। आयोग ने साल 2021 तक लगभग 7,000 मामले प्राप्त होने और उनमें से लगभग 5,000 मामलों को सुलझाने का दावा किया था। इसके अलावा, नवंबर 2021 में पाकिस्तान की नेशनल असेंबली ने जबरन गायब करने के कृत्य को अपराध घोषित करने के लिए एक कानून पारित किया था, जिसमें दोषियों के लिए 10 साल की कैद का प्रावधान है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

पाकिस्तान में नए लापता मामलों में किन लोगों के नाम शामिल हैं?

हालिया रिपोर्टों के अनुसार, मोहम्मद हनीफ और गुलाम कादिर के लापता होने की खबर आई है। इसके अलावा एमनेस्टी इंटरनेशनल ने दाद शाह की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है।

गायब होने के मामलों को लेकर पाकिस्तान का क्या कानून है?

पाकिस्तान की नेशनल असेंबली ने नवंबर 2021 में एक विधेयक पारित किया था, जिसके तहत जबरन गायब करने के दोषी पाए जाने वाले लोगों को 10 साल की कैद की सजा का प्रावधान है।

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.