10 अप्रैल 2026 को पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार और फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बारोट के बीच फोन पर अहम बातचीत हुई। इस दौरान दोनों नेताओं ने लेबनान में हो रहे सीजफायर के गंभीर उल्लंघनों पर गहरी चिंता व्यक्त की। पाकिस्तान और फ्रांस का मानना है कि शांति समझौते का पूरी तरह पालन होना चाहिए ताकि क्षेत्र में स्थिरता बनी रहे। इस बातचीत में फ्रांस ने पाकिस्तान की उन कोशिशों की भी सराहना की जो उसने अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता के लिए की हैं।

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लेबनान और शांति समझौते को लेकर क्या है विवाद?

इस पूरे विवाद की मुख्य वजह सीजफायर समझौते की अलग-अलग व्याख्या है। फ्रांस और पाकिस्तान जैसे देश चाहते हैं कि लेबनान को भी इस समझौते का हिस्सा बनाया जाए। वहीं अमेरिका और इसराइल का कहना है कि यह समझौता लेबनान के लिए नहीं है। इसी भ्रम के बीच लेबनान में भारी बमबारी हुई है जिससे हालात और खराब हो गए हैं। ईरान ने भी चेतावनी दी है कि अगर लेबनान में इसराइल के हमले जारी रहे तो वह इस समझौते पर दोबारा विचार कर सकता है।

मामले से जुड़ी मुख्य बातें और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

  • फ्रांस के विदेश मंत्री ने कहा कि ईरान और अमेरिका के बीच हुए समझौते में लेबनान की सैन्य कार्रवाइयों को भी शामिल करना जरूरी है।
  • इसराइल के प्रधानमंत्री कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि सीजफायर लेबनान को कवर नहीं करता है।
  • लेबनान में हुए हालिया हवाई हमलों में 200 से ज्यादा लोगों के मारे जाने की खबर है।
  • लेबनान के संसद अध्यक्ष ने इन हमलों को युद्ध अपराध बताते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से दखल की मांग की है।
  • संयुक्त राष्ट्र के महासचिव ने चेतावनी दी है कि इसराइल के ये हमले पूरे शांति समझौते को खतरे में डाल सकते हैं।
  • ब्रिटेन, स्पेन और इटली ने भी लेबनान में हमलों की निंदा की है और शांति की अपील की है।
Sushma Kumari

Shushma covers Stories Around Expats and Helpful Contents Related to Daily life of Public. She completed Mass Communication Degree From Makhan lal Chaturvedi College Bhopal and Has 3 years of Field Experience. Earlier She Worked with Jagran Media Patna Office and Now Working with GulfHindi.com