पाकिस्तान में महंगाई ने आम जनता की कमर तोड़ दी है। सरकार द्वारा पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी इजाफा करने के बाद नेशनल असेंबली में जबरदस्त विरोध देखने को मिला। विपक्षी सांसदों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और सदन की कार्यवाही को बीच में ही रोकना पड़ा। इस संकट के बीच मीडियाकर्मियों ने भी अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया जिससे सरकार की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।

तेल की कीमतों में कितनी हुई बढ़ोतरी और क्या है मुख्य वजह?

सरकार ने पेट्रोल और डीजल के दामों में भारी वृद्धि की है जिसके पीछे वैश्विक कारणों का हवाला दिया गया है। सरकार का कहना है कि मध्य पूर्व में चल रहे तनाव की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ी हैं जिसका असर पाकिस्तान पर पड़ रहा है।

  • पेट्रोल की कीमतों में 43 फीसदी की बड़ी बढ़ोतरी की गई है।
  • हाई-स्पीड डीजल के दाम में 55 फीसदी का इजाफा हुआ है।
  • पेट्रोल पर लेवी को 105 रुपये से बढ़ाकर 160 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।
  • सरकार का दावा है कि उन्होंने तीन हफ्तों तक 129 अरब रुपये का बोझ खुद उठाकर कीमतों को रोकने की कोशिश की थी।

आम जनता और राहत के लिए सरकार ने क्या कदम उठाए?

महंगाई के इस दौर में सरकार ने कुछ खास वर्गों के लिए राहत देने की घोषणा की है। पेट्रोल और डीजल के बढ़ते दामों से निपटने के लिए लक्षित सब्सिडी योजना तैयार की गई है। सरकार चाहती है कि गरीब तबके पर इसका बोझ कम से कम पड़े। राहत से जुड़ी कुछ मुख्य बातें नीचे दी गई टेबल में देख सकते हैं:

लाभार्थी वर्ग राहत का विवरण
मोटरसाइकिल सवार पेट्रोल पर 100 रुपये की सब्सिडी
छोटे किसान 1,500 रुपये प्रति एकड़ की मदद
ट्रांसपोर्टर्स 70,000 से 1,00,000 रुपये तक की सहायता
संसद सदस्य (MNA) वेतन में 21 मिलियन रुपये की कुल कटौती

विपक्ष का विरोध और आगामी प्रदर्शन की चेतावनी

विपक्षी दलों जैसे पीटीआई और जमात-ए-इस्लामी ने सरकार के इस कदम को जनता पर जुल्म बताया है। सदन के अंदर सांसदों ने एजेंडे की कॉपियां फाड़ दीं और प्रधानमंत्री के खिलाफ नारे लगाए। जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख ने चेतावनी दी है कि अगर ये बढ़ी हुई कीमतें वापस नहीं ली गईं, तो वे देशभर में हड़ताल और चक्का जाम करेंगे। दूसरी तरफ सरकार ने अपने खर्चों में कटौती करने के लिए नेशनल असेंबली की 75 फीसदी सरकारी गाड़ियों को खड़ा करने और सौर ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़ाने का फैसला लिया है।