पाकिस्तान में पिछले आधे दशक का सबसे बड़ा फ्यूल प्राइस शॉक आया है। तेल की बढ़ती कीमतों की वजह से देश की अर्थव्यवस्था और प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ की सरकार पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। इस संकट ने आम आदमी की जिंदगी और कारोबार को बुरी तरह प्रभावित किया है।
पाकिस्तान में तेल की कीमतों में बढ़ोतरी की असली वजह क्या है?
इस संकट की मुख्य वजह दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों का बढ़ना है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव की वजह से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ के रास्ते तेल की सप्लाई पर असर पड़ा है। इस वजह से पाकिस्तान का मासिक तेल आयात बिल 300 मिलियन डॉलर से बढ़कर लगभग 800 मिलियन डॉलर तक पहुँच गया है। प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ के मुताबिक इस वजह से पिछले दो साल की आर्थिक तरक्की खत्म हो गई है। सरकार ने अब वैश्विक तेल कीमतों पर नज़र रखने के लिए एक निगरानी तंत्र और स्पेशल टास्क फोर्स बनाई है जो रोज़ाना सप्लाई और कीमतों की समीक्षा करेगी।
आम जनता और ट्रांसपोर्ट के लिए सरकार ने क्या इंतजाम किए?
जनता के गुस्से और विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए सरकार ने कई राहत कदम उठाए हैं। प्रधानमंत्री ने पेट्रोलियम लेवी में 80 रुपये प्रति लीटर की कटौती की है जिससे पेट्रोल का दाम 458 रुपये से घटकर 378 रुपये प्रति लीटर हो गया है। इसके अलावा, इंटीरियर मिनिस्टर मोहसिन नकवी ने ऐलान किया कि इस्लामाबाद में सार्वजनिक परिवहन 30 दिनों के लिए मुफ्त रहेगा। पंजाब और सिंध जैसे प्रांतों में ट्रक और बसों के लिए भी सब्सिडी दी गई है। सरकार ने कीमतों को स्थिर रखने के लिए विकास कार्यों की बचत से 129 अरब रुपये खर्च किए हैं और कैबिनेट सदस्यों की सैलरी में कटौती की अवधि को दो महीने से बढ़ाकर छह महीने कर दिया है।
| विवरण | पुराना डेटा / स्थिति | नया डेटा / स्थिति |
|---|---|---|
| मासिक तेल आयात बिल | 300 मिलियन डॉलर | 800 मिलियन डॉलर |
| पेट्रोल की कीमत (प्रति लीटर) | 458 रुपये | 378 रुपये |
| सरकार द्वारा वहन की गई लागत | – | 129 अरब रुपये |
| कैबिनेट सैलरी कटौती | 2 महीने | 6 महीने |
इन्फॉर्मेशन मिनिस्टर अताउल्लाह तरार और जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ. मुसादिक मलिक ने बताया कि सरकार ने ईंधन की कमी को रोकने में सफलता पाई है। वहीं, प्रधानमंत्री शरीफ ने अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ बन कर तनाव कम करने की कोशिश की है ताकि आर्थिक स्थिरता बनी रहे।
Frequently Asked Questions (FAQs)
पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमतें क्यों बढ़ीं?
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव की वजह से कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में उछाल आया, जिससे पाकिस्तान का तेल आयात बिल 300 मिलियन डॉलर से बढ़कर 800 मिलियन डॉलर हो गया।
आम जनता को सरकार ने क्या राहत दी है?
सरकार ने पेट्रोल की कीमतों में 80 रुपये की कटौती की है और इस्लामाबाद में 30 दिनों के लिए सार्वजनिक परिवहन को मुफ्त कर दिया है।