पाकिस्तान में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर एक गंभीर चेतावनी जारी की गई है। Pakistan Medical Association (PMA) ने 16 जुलाई 2026 को देश में नेशनल पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर दी है। यह फैसला इसलिए लिया गया क्योंकि देश में 6,51,000 ऐसे बच्चे हैं जिन्हें रूटीन वैक्सीनेशन नहीं मिल पाया है। ये बच्चे उन बीमारियों के खतरे में हैं जिनसे टीके के जरिए बचा जा सकता था।
हेल्थ सिस्टम पर उठे सवाल
PMA के महासचिव Dr. Abdul Ghafoor Shoro ने इसे प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली की बड़ी विफलता करार दिया है। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में बच्चों का टीकाकरण न होना पूरे सिस्टम की कमजोरी को बताता है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) के आंकड़ों के अनुसार, पाकिस्तान में ‘zero-dose’ बच्चों की संख्या पूर्वी भूमध्यसागरीय क्षेत्र में सबसे ज्यादा है। यह स्थिति तब है जब पूरी दुनिया में इन बच्चों की संख्या कम हो रही है, लेकिन पाकिस्तान में साल 2024 और 2025 के बीच इनकी तादाद बढ़ी है।
प्रशासन की लापरवाही और आगे की राह
PMA ने इस संकट के पीछे भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अगर बच्चों को समय पर DTP1 का टीका नहीं मिला, तो भविष्य में खतरनाक बीमारियों का प्रकोप फैल सकता है। एसोसिएशन ने सरकार से मांग की है कि इम्यूनाइजेशन को ‘नेशनल सिक्योरिटी प्रायोरिटी’ माना जाए। साथ ही, बच्चों को ट्रैक करने के लिए GIS मैपिंग तकनीक का इस्तेमाल करने, वैक्सीन सप्लाई चेन को दुरुस्त करने और स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए भी कहा गया है।
