पाकिस्तान में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध को शांत करने के लिए एक बड़ी कूटनीतिक बैठक शुरू हुई है। सऊदी अरब, तुर्की और मिस्र के विदेश मंत्री इस चर्चा में शामिल होने के लिए शनिवार, 29 मार्च 2026 को इस्लामाबाद पहुंचे हैं। पाकिस्तान इस पूरे मामले में एक मुख्य मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस मुद्दे पर ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से भी फोन पर लंबी बातचीत की है। इस वार्ता का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव को कम करना और शांति का रास्ता निकालना है।

बैठक में कौन-कौन से देश शामिल हैं और क्या है मुख्य एजेंडा?

पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार के निमंत्रण पर यह बैठक बुलाई गई है। इसमें शामिल होने वाले प्रमुख नेता और देश इस प्रकार हैं:

  • सऊदी अरब: विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान अल साऊद बातचीत के लिए इस्लामाबाद पहुंच रहे हैं।
  • तुर्की: विदेश मंत्री हकन फिदान ने पहले ही ईरान को तनाव से बचने की सलाह दी है और वे इस बैठक का हिस्सा हैं।
  • मिस्र: विदेश मंत्री डॉ. बद्र अब्देलाती ने वार्ता के जरिए समाधान निकालने पर जोर दिया है।
  • पाकिस्तान: प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अमेरिका और ईरान के बीच सीधी बातचीत की मेजबानी करने का प्रस्ताव दिया है, जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से हरी झंडी मिलने की खबर है।

व्हाइट हाउस ने पाकिस्तान के जरिए ईरान को 15 बिंदुओं वाला एक शांति समझौता प्रस्ताव भेजा है। हालांकि, ईरान ने फिलहाल इसे एकतरफा बताते हुए खारिज कर दिया है, लेकिन बातचीत के रास्ते खुले रखे हैं।

युद्ध के ताजा हालात और आम जनता पर प्रभाव

इस संघर्ष का असर अब पूरे खाड़ी क्षेत्र में दिखने लगा है, जिससे वहां काम करने वाले प्रवासियों और व्यापार पर भी खतरा मंडरा रहा है। युद्ध से जुड़ी कुछ बड़ी बातें नीचे दी गई टेबल में देखी जा सकती हैं:

  • ईरान का रुख
  • विवरण ताजा स्थिति
    कुल जनहानि अब तक 3,000 से अधिक लोगों की मौत
    ईरान में नुकसान 1,900 से अधिक लोग मारे गए
    हॉर्मुज जलडमरूमध्य से 20 पाकिस्तानी जहाजों को निकलने की अनुमति दी
    अमेरिकी सैन्य मौजूदगी करीब 2,500 अमेरिकी मरीन क्षेत्र में पहुंचे
    क्षेत्रीय हमले बहरीन, यूएई और ओमान के इलाकों में भी तनाव की खबरें

    ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने उनके विश्वविद्यालयों पर हुई बमबारी की निंदा नहीं की, तो वे मिडिल ईस्ट में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बना सकते हैं। वहीं, यमन के हूती विद्रोहियों ने भी इजरायल पर मिसाइल हमले शुरू कर दिए हैं, जिससे खाड़ी देशों में रहने वाले लोगों के बीच असुरक्षा का माहौल बना हुआ है। ओमान के सलालाह बंदरगाह पर भी ड्रोन हमले में एक कर्मचारी के घायल होने की खबर आई है।

    Aanya

    Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.