पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा, भेदभाव और मानवाधिकारों का उल्लंघन बहुत तेजी से बढ़ा है. Human Rights Focus Pakistan (HRFP) ने सोमवार को एक रिपोर्ट जारी की है जिसमें इन समुदायों पर हो रहे अत्याचारों का जिक्र किया गया है. संगठन ने इस गंभीर स्थिति पर गहरी चिंता जताई है और तुरंत कार्रवाई की मांग की है.

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अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ते अपराध

HRFP की रिपोर्ट में बताया गया है कि अल्पसंख्यकों को टारगेट करके उनकी हत्याएं, यौन हिंसा और जबरन धर्म परिवर्तन जैसे अपराध किए जा रहे हैं. इसके अलावा झूठे ईशनिंदा (blasphemy) के आरोप लगाना, मनमाने ढंग से जेल में डालना, अपहरण और बंधुआ मजदूरी जैसी घटनाएं भी सामने आई हैं. पूजा स्थलों पर हमले और नौकरी में भेदभाव भी आम बात हो गई है.

जनवरी से जून 2026 के बीच HRFP की Religious Victims Human Rights (REAT) हेल्पलाइन पर 600 से ज्यादा कॉल आए. ये सभी कॉल धर्म या विश्वास के आधार पर होने वाले मानवाधिकार उल्लंघन से जुड़े थे.

अमीर पीटर की मौत और ईशनिंदा कानून

रिपोर्ट में 60 साल के ईसाई नागरिक Amir Peter का मामला सामने आया है. उन्होंने 1 जुलाई 2026 को जेल में दम तोड़ दिया. उन्हें ईशनिंदा के आरोप में लगभग एक साल से हिरासत में रखा गया था. उनकी तबीयत बिगड़ने पर कई बार मेडिकल बेल की मांग की गई लेकिन उन्हें रिहा नहीं किया गया. HRFP ने कहा कि पाकिस्तान के ईशनिंदा कानूनों का इस्तेमाल अक्सर निजी दुश्मनी निकालने और कमजोर लोगों को डराने के लिए किया जाता है.

अलग-अलग समुदायों पर हमले

  • अहमदिया समुदाय: इस समुदाय के लोगों को विशेष कानूनों के जरिए निशाना बनाया जाता है. साल 2024 में उनके विश्वास की वजह से छह लोगों की हत्या हुई, जिनमें से दो पंजाब में जून 2024 में मारे गए.
  • महिलाएं और लड़कियां: हिंदू और ईसाई समुदाय की लड़कियों का अपहरण कर जबरन धर्म परिवर्तन और शादी कराने के मामले बढ़े हैं. रिपोर्ट के मुताबिक हर साल करीब 1,000 लड़कियों को जबरन इस्लाम में परिवर्तित कर उनके अपहरणकर्ताओं से शादी कराई जाती है.
  • शिया समुदाय: कुर्रम, गिलगित-बाल्टिस्तान और कराची के कुछ इलाकों में शिया समुदायों के खिलाफ सांप्रदायिक हिंसा तेज हुई है.
  • भीड़ की हिंसा: जून 2024 में स्वात में एक मुस्लिम पर्यटक और सरगोधा में एक ईसाई बुजुर्ग की भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी, क्योंकि उन पर कुरान के अपमान का आरोप था.

जांच और सुधार की मांग

HRFP ने मांग की है कि Amir Peter की मौत की स्वतंत्र न्यायिक जांच हो और उन अधिकारियों की जवाबदेही तय हो जिन्होंने उन्हें इलाज नहीं दिलवाया. संगठन ने ईशनिंदा कानून में बड़े बदलाव और अल्पसंख्यक अधिकारों की निगरानी के लिए National Commission for Minorities (NCM) बनाने की वकालत की है.

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर UN विशेषज्ञों ने पाकिस्तान को ईशनिंदा कानूनों को बदलने और लड़कियों के जबरन धर्म परिवर्तन को रोकने की सलाह दी है. वहीं, US Commission on International Religious Freedom (USCIRF) ने 2002 से लगातार पाकिस्तान को धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन के कारण ‘Country of Particular Concern’ (CPC) घोषित करने की सिफारिश की है.