ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के लिए पाकिस्तान ने एक बड़ी कोशिश की है। पाकिस्तान के गृह मंत्री Mohsin Naqvi 20 मई 2026 को तेहरान पहुंचे, जहां उन्होंने ईरान के बड़े अधिकारियों के साथ कई अहम बैठकें कीं। इस यात्रा का मुख्य मकसद ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे विवाद को सुलझाना और एक स्थायी समझौता कराना है ताकि इलाके में शांति बनी रहे।

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ईरान और अमेरिका के बीच पाकिस्तान क्यों कर रहा है बीच-बचाव?

पाकिस्तान इस समय एक मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है ताकि ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध जैसी स्थिति न बने। गृह मंत्री Mohsin Naqvi ने अपनी बातचीत को उपयोगी बताया और कहा कि पाकिस्तान क्षेत्रीय स्थिरता के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस दौरान उन्होंने कई ईरानी अधिकारियों से मुलाकात की:

  • Abbas Araghchi: ईरान के विदेश मंत्री, जिन्होंने सुरक्षा और आर्थिक सहयोग पर चर्चा की।
  • Masoud Pezeshkian: ईरान के राष्ट्रपति, जिनसे Naqvi ने अपनी पिछली यात्रा में मुलाकात की थी।
  • Mohammad Bagher Qalibaf: ईरान के संसद अध्यक्ष।
  • Eskandar Momeni: ईरान के गृह मंत्री।

IRGC की चेतावनी और अमेरिका का कड़ा रुख

एक तरफ जहां पाकिस्तान शांति की कोशिश कर रहा है, वहीं ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने अमेरिका को सख्त चेतावनी दी है। IRGC के कमांडर Major General Ahmad Vahidi ने कहा कि अगर अमेरिका ने फिर से हमला किया, तो यह युद्ध केवल मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रहेगा और इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि ईरान अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिए हर तरह से तैयार है।

दूसरी तरफ, अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने 18 मई को बताया कि उन्होंने अपने खाड़ी देशों के सहयोगियों के कहने पर ईरान पर होने वाले हमलों को फिलहाल रोक दिया है। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि तेहरान के पास समझौता करने के लिए बहुत कम दिन बचे हैं। अमेरिका के उपराष्ट्रपति JD Vance ने कहा कि बातचीत में प्रगति हो रही है, लेकिन अमेरिकी सेना किसी भी हमले के लिए पूरी तरह तैयार है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

पाकिस्तान के गृह मंत्री तेहरान क्यों गए थे?

मोहसिन नकवी ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम करने और एक स्थायी समझौता कराने के लिए मध्यस्थता करने तेहरान गए थे।

IRGC ने अमेरिका को क्या चेतावनी दी है?

IRGC कमांडर अहमद वहिदी ने चेतावनी दी है कि अमेरिका द्वारा किसी भी सैन्य कार्रवाई का जवाब बहुत कठोर होगा और यह युद्ध मिडिल ईस्ट की सीमाओं से बाहर फैल जाएगा।