Pakistan और Iran की बात चीत, Mecca Defense Pact पर हुई चर्चा और regional politics पर असर.

पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री Mohammad Ishaq Dar ने सोमवार, 10 अगस्त 2026 को ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi के साथ फोन पर एक महत्वपूर्ण बातचीत की। इस बातचीत का मुख्य मुद्दा हाल ही में साइन किया गया Mecca Joint Defense Agreement था, जिस पर दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय राजनीति और सुरक्षा के हालातों को लेकर विस्तार से चर्चा की। पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने ईरानी समकक्ष को इस नए रक्षा समझौते के मुख्य ढांचे और उसके उद्देश्यों के बारे में पूरी जानकारी दी और बताया कि इस समझौते का मकसद आपसी रणनीतिक सहयोग को मजबूत करना और क्षेत्रीय शांति व सुरक्षा में अपना योगदान देना है।
मक्का रक्षा समझौते की मुख्य बातें
यह Mecca Joint Defense Agreement असल में एक त्रिपक्षीय आपसी रक्षा समझौता है, जिसे 7 अगस्त 2026 को सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की द्वारा साइन किया गया था। इस समझौते के नियमों के मुताबिक यदि इन तीनों देशों में से किसी भी एक देश पर कोई सशस्त्र हमला होता है, तो उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा, जो बिल्कुल नाटो के आर्टिकल 5 की तरह है। तुर्की के विदेश मंत्री Hakan Fidan ने इस बारे में बयान देते हुए कहा था कि यह समझौता पूरी तरह से रक्षात्मक स्वभाव का है और यह किसी भी खास देश के खिलाफ नहीं बनाया गया है। इस समझौते के तहत आने वाले दिनों में कई मंत्री स्तरीय, राजनीतिक और सैन्य समितियों के साथ-साथ एक स्थायी सचिवालय भी बनाया जाएगा।
ईरान की प्रतिक्रिया और ओमान से बातचीत
पाकिस्तानी विदेश मंत्री द्वारा दी गई इस ब्रीफिंग के बाद ईरानी मंत्री Abbas Araghchi ने उनका शुक्रिया अदा किया और साथ ही ओमान के साथ चल रही उन बातचीत की जानकारी दी जो फारसी खाड़ी के हॉर्मूज जलडमरूमध्य से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही को लेकर हो रही हैं। दोनों देशों के विदेश मंत्रियों ने मौजूदा क्षेत्रीय राजनीति पर भी अपने विचार रखे और यह सहमति जताई कि वे आपसी हितों के मामलों पर लगातार संपर्क बनाए रखेंगे। इसी दिन कुवैत ने भी इस नए समझौते को लेकर पाकिस्तान को अपनी तरफ से बधाई दी थी।
ईरानी अधिकारियों और विश्लेषकों का नजरिया
इस समझौते के रक्षात्मक होने के दावों के बावजूद ईरान के अधिकारियों और विश्लेषकों की तरफ से अलग-अलग राय सामने आई। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmail Baghaei ने सार्वजनिक रूप से इस मक्का समझौते से किसी भी तरह के खतरे को खारिज किया और इसे इस्राइल की महत्वाकांक्षाओं तथा अमरीकी सुरक्षा गारंटियों पर कम होते क्षेत्रीय भरोसे की प्रतिक्रिया के रूप में बताया। हालांकि कुछ ईरानी टिप्पणीकारों ने इस बात पर भी जोर दिया कि इस उभरते हुए क्षेत्रीय गठबंधन की ताकत को कम करके नहीं आंकना चाहिए और इस पर कड़ी नजर रखनी चाहिए क्योंकि यह आने वाले समय में मध्य पूर्व के समीकरणों को पूरी तरह से बदल सकता है।