पाकिस्तान और ईरान की उच्च स्तरीय बैठक, अमेरिका-ईरान तनाव कम करने के लिए तेहरान पहुंचे पाकिस्तानी अधिकारी।

Nura Basta25 August 20262 min read53 viewsWorld
पाकिस्तान और ईरान की उच्च स्तरीय बैठक, अमेरिका-ईरान तनाव कम करने के लिए तेहरान पहुंचे पाकिस्तानी अधिकारी।

क्षेत्रीय तनाव को कम करने और शांति स्थापित करने के लिए पाकिस्तान और ईरान के बीच उच्च स्तर पर बातचीत हुई है। 24 अगस्त 2026 को पाकिस्तान का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल तेहरान पहुंचा था, जिसके बाद 25 अगस्त 2026 को इसके फॉलो-अप अपडेट सामने आए। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेस (CDF) फील्ड मार्शल Syed Asim Munir ने किया और उनके साथ इंटीरियर मिनिस्टर Mohsin Naqvi भी मौजूद थे। कुवैत न्यूज एजेंसी (KUNA) द्वारा इस दौरे की पुष्टि की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य चल रहे अमेरिका-ईरान संघर्ष को रोकना और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए रास्ते तलाशना था।

पाकिस्तान और ईरान के बीच कूटनीतिक चर्चा

पाकिस्तान के इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (ISPR) की ओर से जारी बयान के अनुसार, इस यात्रा का मकसद वाशिंगटन और तेहरान के बीच चल रहे कूटनीतिक गतिरोध को समाप्त करना था। बातचीत के बाद इंटीरियर मिनिस्टर Mohsin Naqvi ने ईरानी नेतृत्व के साथ चर्चा में महत्वपूर्ण प्रगति होने की बात कही। उन्होंने ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeksian के साथ हुई इस मुलाकात को बेहद सकारात्मक और उत्पादक बताया। इन बैठकों के दौरान मध्य पूर्व के तनाव, रणनीतिक होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और इस्लामाबाद समझौते (MoU) को बहाल करने के कदमों पर विस्तार से चर्चा की गई।

ईरान के नेताओं की प्रतिक्रिया और क्षेत्रीय स्थिरता

ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeksian ने इस संकट को सुलझाने में पाकिस्तान की रचनात्मक भूमिका की सराहना की। हालांकि दूसरी ओर, ईरानी संसद के स्पीकर Mohammad Bagher Qalibaf ने अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने अमेरिका पर इस्लामाबाद समझौते के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं को बार-बार पूरा करने में विफल रहने का आरोप लगाया, जिसे उन्होंने क्षेत्रीय स्थिरता के लिए सबसे बड़ी बाधा बताया। फील्ड मार्शल Syed Asim Munir ने सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल पर सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि Mohsen Rezaei, विदेश मंत्री Abbas Araghchi और इंटीरियर मिनिस्टर Eskandar Momeni सहित कई बड़े ईरानी अधिकारियों के साथ लंबी बैठकें कीं। इन सभी चर्चाओं में सैन्य तनाव को आगे बढ़ने से रोकने और इस संघर्ष का शांतिपूर्ण समाधान निकालने को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी गई ताकि यह विवाद पूरे क्षेत्र में न फैले।

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