पाकिस्तान ने एक बार फिर दुनिया को हैरान कर दिया है। ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव के बीच पाकिस्तान ने ईरान के सैन्य विमानों को अपने एयरबेस का इस्तेमाल करने की इजाजत दी। पाकिस्तान की सरकार पहले इसे मना कर रही थी, लेकिन अब उसकी अपनी ही गलती से यह सच सबके सामने आ गया है।
पाकिस्तान के एयरबेस पर ईरान के विमान, क्या है पूरा सच?
12 मई 2026 को पाकिस्तान के Ministry of Foreign Affairs (MoFA) ने एक बयान जारी किया। इसमें उन्होंने CBS News की एक रिपोर्ट को गलत बताने की कोशिश की थी, लेकिन गलती से यह मान लिया कि ईरान के विमान वहां मौजूद हैं। मंत्रालय ने कहा कि ये विमान सीजफायर के दौरान आए थे और इनका किसी सैन्य तैयारी से लेना-देना नहीं है। इससे पहले एक वरिष्ठ अधिकारी ने दावा किया था कि Nur Khan Air Base शहर के बीच में है, इसलिए वहां इतने सारे विमानों को छुपाना मुमकिन नहीं है।
अमेरिका की प्रतिक्रिया और ईरान की रणनीति
- अमेरिका के अधिकारियों ने CBS News को बताया कि ईरान ने अपने RC-130 जासूसी विमान पाकिस्तान के Nur Khan एयरबेस पर भेजे थे।
- यह कदम तब उठाया गया जब अप्रैल की शुरुआत में राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के साथ सीजफायर का ऐलान किया था।
- अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि ईरान ने अपने विमानों को अमेरिकी एयरस्ट्राइक से बचाने के लिए पाकिस्तान की जमीन का इस्तेमाल किया।
- अमेरिकी Senator Lindsey Graham ने इस घटना के बाद कहा कि अब अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ के रूप में पाकिस्तान की भूमिका पर फिर से विचार करने की जरूरत है।
- White House और Pentagon ने इस मामले पर कोई विस्तृत टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है।
विवाद की टाइमलाइन और अफगानिस्तान का रोल
अमेरिका और ईरान के बीच यह टकराव 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ था, जिसके बाद 8 अप्रैल 2026 को सीजफायर हुआ। इसी बीच ऐसी खबरें भी आईं कि ईरान ने अपने कुछ नागरिक विमान Afghanistan के काबुल और हेरात में भेजे थे। एक अफगान नागरिक उड्डयन अधिकारी ने Mahan Air के विमान के वहां होने की बात कही, लेकिन तालिबान प्रवक्ता Zabihullah Mujahid ने इन रिपोर्टों को खारिज कर दिया है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
ईरान ने पाकिस्तान के एयरबेस का इस्तेमाल क्यों किया?
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक ईरान ने अपने सैन्य विमानों, खास तौर पर RC-130 जासूसी विमानों को अमेरिकी हमलों से बचाने के लिए पाकिस्तान के Nur Khan Air Base पर भेजा था।
पाकिस्तान सरकार ने इस मामले में क्या सफाई दी है?
पाकिस्तान के Ministry of Foreign Affairs ने कहा कि ईरानी विमान सीजफायर की अवधि के दौरान पाकिस्तान आए थे और उनका किसी सैन्य अभियान या विशेष व्यवस्था से कोई संबंध नहीं है।
