पाकिस्तान के कराची शहर में एक नाबालिग ईसाई लड़की की शादी को कोर्ट से मंजूरी मिलने के बाद काफी गुस्सा देखा गया. कैथोलिक चर्च और अन्य सामाजिक संगठनों ने इस फैसले के खिलाफ सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों ने जबरन धर्म परिवर्तन को रोकने और नाबालिग लड़कियों को इंसाफ दिलाने की मांग की है.

कोर्ट ने क्या फैसला सुनाया और क्यों?

25 मार्च 2026 को फेडरल कॉन्स्टिट्यूशनल कोर्ट ने मारिया बीबी नाम की लड़की की एक मुस्लिम व्यक्ति शेहरयार अहमद से हुई शादी को सही ठहराया. मारिया के पिता शाहबाज मसीह ने कोर्ट में कहा था कि उनकी बेटी की उम्र करीब 13 साल है और उसे जुलाई 2025 में जबरन रखा गया था. लेकिन कोर्ट ने उम्र के रिकॉर्ड को अविश्वसनीय माना और कहा कि लड़की दिखने में अपनी उम्र से बड़ी है. कोर्ट ने यह भी कहा कि इस्लाम में धर्म परिवर्तन के लिए सिर्फ विश्वास की घोषणा काफी है.

प्रदर्शन और ईसाई समुदाय की मांगें क्या हैं?

इस फैसले के बाद 14 अप्रैल 2026 को कराची के सेंट पैट्रिक कैथेड्रल में बड़ा प्रदर्शन हुआ. इसमें लोगों ने तख्तियां ली थीं जिन पर लिखा था कि बाल विवाह एक अपराध है. बिशप सैमसन शुकार्डिन और अन्य ईसाई नेताओं ने चिंता जताई कि कोर्ट नाबालिगों की शादी रोकने वाले कानूनों को सही से लागू नहीं कर रहे हैं. संघीय सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने कहा है कि वह इस मामले में कानून मंत्री के साथ बैठक करेंगे और ईसाइयों की चिंताओं को दूर किया जाएगा.

पाकिस्तान में बाल विवाह को लेकर क्या नियम हैं?

पाकिस्तान के अलग-अलग हिस्सों में बाल विवाह को रोकने के लिए कुछ नए कानून और बिल लाए गए हैं. नीचे दी गई टेबल में इसकी पूरी जानकारी है:

कानून/घटना मुख्य प्रावधान/विवरण सजा/असर
ICT चाइल्ड मैरिज एक्ट 2025 शादी की न्यूनतम उम्र 18 साल पुरुष को 3 साल और मददगारों को 7 साल जेल
पंजाब चाइल्ड मैरिज बिल 2026 न्यूनतम उम्र 18 साल का प्रस्ताव 7 साल तक की जेल और भारी जुर्माना
लाहौर हाई कोर्ट फैसला (2024) लड़कियों के लिए 16 साल की उम्र का नियम खत्म इसे असंवैधानिक घोषित किया गया
मारिया बीबी केस फैसला 25 मार्च 2026 को शादी को मंजूरी उम्र के दस्तावेजों को कोर्ट ने नकारा
कराची विरोध प्रदर्शन 14 अप्रैल 2026 को प्रदर्शन जबरन धर्म परिवर्तन रोकने की मांग