पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा (KP) प्रांत में स्वास्थ्य सेवाएं ठप होने का खतरा बढ़ गया है। यहाँ के डॉक्टरों ने अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। अगर वेतन नहीं बढ़ा, तो पूरे प्रांत के अस्पतालों में कामकाज बंद हो सकता है जिससे आम जनता को इलाज के लिए भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा।

वेतन विवाद और डॉक्टरों की चेतावनी

Young Doctors Association (YDA) ने साफ कहा है कि सरकार सालों से उनके वित्तीय मुद्दों को नजरअंदाज कर रही है। YDA नेता Adnan ने पेशावर प्रेस क्लब में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि सरकार ने कई बार आश्वासन दिया लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों को अनसुना किया गया, तो डॉक्टर पूरे प्रांत में प्रदर्शन करेंगे और अस्पतालों का रूटीन काम रोक देंगे।

क्या है डॉक्टरों की मुख्य मांग

KP प्रांत में डॉक्टरों की तनख्वाह पिछले काफी समय से नहीं बढ़ाई गई है। जानकारी के मुताबिक, 2016 के बाद से वेतन में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है, जबकि महंगाई और काम का बोझ लगातार बढ़ रहा है। इस मामले में कुछ अहम बिंदु नीचे दिए गए हैं:

  • प्रांतीय स्वास्थ्य सचिव ने डॉक्टरों की सैलरी में 40 से 50 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया है।
  • YDA ने मुख्यमंत्री Ali Amin Gandapur, स्वास्थ्य मंत्री और वित्त अधिकारियों से इस प्रस्ताव को तुरंत लागू करने की अपील की है।
  • डॉक्टरों ने मांग की है कि आगामी प्रांतीय बजट में वेतन वृद्धि को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए।

सड़कों पर उतरेंगे डॉक्टर, इमरजेंसी रहेगी चालू

YDA नेता Adnan ने बताया कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो आने वाले विरोध प्रदर्शन केवल अस्पतालों तक सीमित नहीं रहेंगे। डॉक्टर सड़कों पर उतरेंगे और मुख्यमंत्री सचिवालय, स्वास्थ्य मंत्री के दफ्तर और वित्त विभाग के बाहर प्रदर्शन करेंगे। हालांकि, डॉक्टरों ने यह स्पष्ट किया है कि मरीजों की सुविधा के लिए इमरजेंसी सेवाओं को चालू रखा जाएगा ताकि आम लोगों को ज्यादा तकलीफ न हो।

पुराना विवाद और पिछला विरोध

यह पहली बार नहीं है जब KP के डॉक्टरों ने इस मुद्दे पर आवाज उठाई है। जून 2026 की शुरुआत में भी प्रांतीय स्वास्थ्य सचिवालय के बाहर बड़े विरोध प्रदर्शन और धरने हुए थे। Provincial Doctors Association (PDA) के चेयरमैन डॉ Zubair ने भी पहले वेतन वृद्धि के लिए अल्टीमेटम दिया था। डॉक्टरों का कहना है कि भ्रष्टाचार और प्रमोशन में देरी जैसे मुद्दे भी उनकी परेशानी बढ़ा रहे हैं।