पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा (K-P) प्रांत में एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। मुख्यमंत्री सोहेल अफ़रीदी के नेतृत्व में प्रांतीय सरकार ने केंद्र सरकार के खिलाफ बगावत कर दी है। 6 मई 2026 को पूरे प्रांत में ‘पेन-डाउन स्ट्राइक’ की गई, जिससे सरकारी कामकाज पूरी तरह रुक गया।
K-P सरकार ने क्यों की कलम हड़ताल और क्या है पूरा विवाद?
यह विरोध केंद्र सरकार द्वारा किए जा रहे भेदभाव के खिलाफ था। K-P सरकार का कहना है कि उन्हें नेशनल फाइनेंस कमीशन (NFC) अवार्ड में सही हिस्सा नहीं मिल रहा है। साथ ही, बिजली और गैस के संसाधनों के बंटवारे में भी उनके साथ नाइंसाफी हो रही है। मुख्यमंत्री सोहेल अफ़रीदी ने गैस लोडशेडिंग को संविधान के अनुच्छेद 158 का उल्लंघन बताया है। सरकारी प्रवक्ता के मुताबिक, यह फेडरेशन को एक शांतिपूर्ण लेकिन कड़ा संदेश देने की कोशिश थी क्योंकि उनके अधिकारों को नजरअंदाज किया जा रहा है।
दफ्तरों में क्या हुआ और इमरान खान का क्या कनेक्शन है?
हड़ताल के दौरान सरकारी दफ्तर तो खुले रहे, लेकिन अधिकारियों ने फाइलों पर साइन करना और कागजी काम करना बंद कर दिया। हालांकि, इमरजेंसी और जरूरी सेवाएं चालू रखी गईं ताकि आम लोगों को परेशानी न हो। इस विरोध का एक बड़ा कारण पूर्व प्रधानमंत्री Imran Khan और उनकी पत्नी Bushra Bibi की हिरासत की स्थिति भी है। K-P अधिकारियों ने आरोप लगाया है कि उन्हें पर्याप्त कानूनी मदद, परिवार से मिलने और मेडिकल जांच की सुविधा नहीं दी जा रही है।
ताजा अपडेट और अन्य घटनाक्रम
मुख्यमंत्री सोहेल अफ़रीदी, जिन्होंने 15 अक्टूबर 2025 को पद संभाला था, पहले भी ड्रोन हमलों और गैस की कमी के खिलाफ विरोध जता चुके हैं। 8 मई 2026 को उन्होंने चरसाडा में पत्रकारों से बात करते हुए एक धार्मिक विद्वान की हत्या पर दुख जताया और शांति के लिए एकता की बात की। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस विरोध से केंद्र और प्रांत के बीच तनाव और बढ़ सकता है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
K-P सरकार की ‘पेन-डाउन स्ट्राइक’ क्या है?
यह एक तरह का शांतिपूर्ण विरोध था जिसमें 6 मई 2026 को सरकारी कर्मचारियों ने दफ्तर आकर भी फाइलों पर साइन करना और प्रशासनिक काम करना बंद कर दिया था।
K-P सरकार केंद्र सरकार से क्यों नाराज है?
मुख्य नाराजगी NFC अवार्ड में कम हिस्सेदारी, बिजली और गैस के गलत बंटवारे और पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की हिरासत की शर्तों को लेकर है।