अमेरिका और ईरान के बीच चल रही जंग का सीधा असर अब पड़ोसी देश पाकिस्तान के आम लोगों के जेब पर दिखने लगा है। बकरीद से ठीक पहले पाकिस्तान की पशु मंडियों में सन्नाटा पसरा हुआ है। इस जंग के कारण दुनिया भर में तेल की कीमतें बढ़ी हैं, जिससे पाकिस्तान में पेट्रोल और डीजल के दाम में 56 फीसदी से 64 फीसदी तक की भारी बढ़ोतरी हुई है। इसके चलते पशुओं को मंडियों तक लाने का किराया और चारे का खर्च काफी बढ़ गया है, जिससे जानवरों की कीमतें आसमान छू रही हैं और आम लोगों के लिए व्यक्तिगत रूप से कुर्बानी का जानवर खरीदना मुश्किल हो गया है।
आखिर क्यों अचानक इतनी बढ़ गईं कुर्बानी के जानवरों की कीमतें?
28 फरवरी 2026 को शुरू हुए इस संघर्ष के बाद से पाकिस्तान में ईंधन की कीमतों में दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है। इसका सीधा असर पाकिस्तान के पशु व्यापारियों पर पड़ा है।
- परिवहन खर्च में भारी बढ़ोतरी: पेट्रोल और डीजल के दाम 56% से 64% तक बढ़ने से ट्रांसपोर्टेशन का खर्च दोगुना हो गया है।
- चारे के दाम बढ़े: ईंधन महंगा होने के कारण पशुओं के चारे की ढुलाई भी महंगी हो गई है, जिससे पशुओं को पालने का खर्च बढ़ गया है।
- सामूहिक कुर्बानी की तरफ झुकाव: महंगे जानवरों के कारण मध्यम और निम्न आय वर्ग के लोग अब अकेले बकरा या गाय खरीदने के बजाय सामूहिक कुर्बानी (हिस्सा लेना) को तरजीह दे रहे हैं।
पाकिस्तानी सरकार और आईएमएफ की शर्तें
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के प्रोग्राम से जुड़े वित्तीय लक्ष्यों को पूरा करने के लिए पाकिस्तानी सरकार को मजबूरन पेट्रोल की कीमतें बढ़ानी पड़ी हैं। ऊर्जा मंत्री अली परवेज मलिक ने संकेत दिया है कि आईएमएफ की प्रतिबद्धताओं के कारण सरकार के पास ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी को रोकने के बहुत कम रास्ते बचे हैं। हालांकि, सरकार ने मोटरसाइकिल चालकों और परिवहन क्षेत्र के लिए कुछ सब्सिडी लागू की है। इससे पहले मार्च 2026 में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ईद-उल-फितर से ठीक पहले ईंधन की कीमतें न बढ़ाकर जनता को राहत देने की कोशिश की थी, लेकिन मौजूदा हालात में सरकार के हाथ बंधे हुए हैं।
जंग को रोकने के लिए पाकिस्तान की मध्यस्थता कोशिशें
इस संकट के बीच पाकिस्तान खुद अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। 24 मई 2026 को अमेरिकी और ईरानी सूत्रों ने युद्ध समाप्त करने के समझौते पर बातचीत में कुछ प्रगति होने की पुष्टि की है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने उम्मीद जताई है कि पाकिस्तान शांति वार्ता के अगले दौर की मेजबानी कर सकता है। जानकारों का कहना है कि अगर यह युद्ध जल्द समाप्त नहीं हुआ तो पाकिस्तान में कृषि, किसानों की आय और खाद्य सुरक्षा पर बहुत बुरा असर पड़ेगा।
Frequently Asked Questions (FAQs)
पाकिस्तान में पेट्रोल और डीजल के दामों में कितनी बढ़ोतरी हुई है?
ईरान युद्ध के बाद से पाकिस्तान में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 56% से 64% तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो दुनिया में दूसरी सबसे बड़ी बढ़ोतरी है।
बकरीद पर इसका क्या असर देखने को मिल रहा है?
परिवहन और चारे का खर्च बढ़ने से जानवरों की कीमतें बहुत बढ़ गई हैं। इसके कारण इस्लामाबाद जैसी बड़ी मंडियों में बिक्री बहुत कम हो गई है और लोग सामूहिक कुर्बानी का विकल्प चुन रहे हैं।
क्या युद्ध खत्म करने के लिए कोई बातचीत चल रही है?
हां, पाकिस्तान इस मामले में अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता कर रहा है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार बातचीत में थोड़ी प्रगति देखी गई है और पाकिस्तान अगले दौर की शांति वार्ता की मेजबानी करना चाहता है।