मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव और युद्ध जैसे हालात की वजह से पाकिस्तान के आम निर्यात पर बुरा असर पड़ा है। इस साल आमों की खेप भेजने में बड़ी गिरावट आई है क्योंकि व्यापार के रास्ते बंद हो गए हैं और शिपिंग का खर्चा बहुत बढ़ गया है। व्यापारियों को डर है कि इस सीजन में आम की बिक्री 30 प्रतिशत तक गिर सकती है।

Ministry of Commerce ने 2026 के आम निर्यात सीजन की तारीख बढ़ाकर 1 जून कर दी थी ताकि फलों की क्वालिटी और मैच्योरिटी बनी रहे। सरकार ने 1 जून से 30 सितंबर 2026 तक ईरान और उसके रास्ते सेंट्रल एशियाई देशों को आम भेजने के लिए कुछ वित्तीय नियमों में छूट दी है ताकि गल्फ देशों से होने वाले नुकसान की भरपाई की जा सके।

Pakistan Fruit and Vegetable Exporters, Importers and Merchants Association (PFVA) के Patron-in-Chief Mian Waheed Ahmed ने बताया कि इस साल निर्यात का लक्ष्य 1,10,000 टन से घटाकर 80,000 टन कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि मिडिल ईस्ट में तनाव, बढ़ते मालभाड़े और खराब मौसम की वजह से यह गिरावट आई है। पाकिस्तान के 80 प्रतिशत आम गल्फ देशों, ईरान और अफगानिस्तान जाते हैं, जहां अभी हालात खराब हैं।

निर्यात और खर्चों का विवरण

विवरण पिछले साल / पहले इस साल (2026)
निर्यात लक्ष्य 1,10,000 टन 80,000 टन
अनुमानित कमाई 110 मिलियन डॉलर 75 से 80 मिलियन डॉलर
समुद्री किराया (प्रति कंटेनर) 1,200-1,400 डॉलर 6,000-7,000 डॉलर
हवाई किराया कम करीब 2 डॉलर प्रति किलो
फसल की पैदावार औसत 20-30 प्रतिशत कम
रास्ते की दूरी (कुछ रूट्स) 700 किलोमीटर करीब 3,500 किलोमीटर

व्यापारियों के सामने सबसे बड़ी समस्या रास्तों की है। अफगानिस्तान के रास्ते सेंट्रल एशिया जाने वाले रास्ते बंद हैं, इसलिए अब माल ईरान के रास्ते भेजा जा रहा है। इससे सफर की दूरी 700 किलोमीटर से बढ़कर 3,500 किलोमीटर हो गई है, जिससे समय ज्यादा लग रहा है और फल खराब होने का खतरा बढ़ गया है।

Sindh Abadgar Board के President Syed Mahmood Nawaz Shah ने बताया कि जलवायु परिवर्तन की वजह से फसल में कीड़ों का हमला बढ़ा है, जिससे पैदावार कम हुई है। वहीं Consultant Dr. Zafar Mehmood ने कहा कि मिडिल ईस्ट की अस्थिरता ने GCC देशों और सेंट्रल एशियाई देशों में पाकिस्तान के बागवानी उत्पादों के व्यापार को काफी नुकसान पहुंचाया है।

देश के अंदर डीजल और पेट्रोल की बढ़ती कीमतों ने भी स्थानीय ट्रांसपोर्ट के खर्च को बढ़ा दिया है। निर्यातकों ने सरकार से मांग की है कि वह पोर्ट क्लियरेंस और गल्फ देशों के खरीदारों के साथ बातचीत कर इस नुकसान को कम करने में मदद करे।