पाकिस्तान में खसरे (Measles) की बीमारी ने बच्चों के बीच भारी तबाही मचाई है। साल 2026 के शुरुआती चार महीनों में ही 71 मासूम बच्चों की जान जा चुकी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक कोविड महामारी के समय नियमित टीकाकरण रुकने से यह संकट खड़ा हुआ है और बड़ी संख्या में बच्चे बिना वैक्सीन के रह गए हैं।

🚨: Makkah Quran Museum: मक्का के म्यूजियम में आई कुरान की पहली जर्मन कॉपी, अब दुनिया भर के लोग पढ़ सकेंगे इसका मतलब

पाकिस्तान के किन प्रांतों में कितनी बच्चों की मौत हुई?

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 2026 के पहले चार महीनों में कुल 71 बच्चों की मौत दर्ज की गई। इनमें सबसे बुरा हाल सिंध प्रांत का रहा जहां 40 बच्चों की जान गई। इसके अलावा पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा में 12-12 मौतें हुईं, जबकि बलूचिस्तान में 4 बच्चों की जान गई। वर्तमान में पाकिस्तान में एक मिलियन से ज्यादा बच्चे ऐसे हैं जिन्हें कभी कोई टीका नहीं लगा, इन्हें जीरो-डोज़ बच्चे कहा जा रहा है।

देशभर में खसरे के कितने मामले सामने आए हैं?

साल की पहली तिमाही यानी पहले तीन महीनों में पूरे पाकिस्तान में 4,541 खसरे के पुष्ट मामले मिले। सबसे ज्यादा केस खैबर पख्तूनख्वा में 1,712 दर्ज हुए। अन्य क्षेत्रों के आंकड़े इस प्रकार हैं:

  • पंजाब: 1,198 मामले
  • सिंध: 1,183 मामले
  • बलूचिस्तान: 197 मामले
  • आजाद जम्मू और कश्मीर: 151 मामले
  • इस्लामाबाद: 55 मामले
  • गिलगित-बाल्टिस्तान: 45 मामले

इस संकट को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?

स्वास्थ्य विभाग और विशेषज्ञ इस स्थिति को सुधारने के लिए कई कोशिशें कर रहे हैं। फेडरल डायरेक्टरेट ऑफ इम्यूनाइजेशन के महानिदेशक डॉ. मूसा खान ने कहा कि नियमित टीकाकरण ही स्वस्थ राष्ट्र की नींव है।

  • विश्व टीकाकरण सप्ताह: 24 अप्रैल से 30 अप्रैल तक जन जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है ताकि टीकाकरण दरों में वृद्धि हो सके।
  • विशेष रणनीति: सिंध के ईपीआई निदेशक डॉ. राज कुमार ने बताया कि खैरपुर जैसे उच्च जोखिम वाले जिलों में वैक्सीन कवरेज बढ़ाने के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं।
  • विशेषज्ञों की मांग: पाकिस्तान मेडिकल एसोसिएशन के डॉ. अब्दुल गफूर शोरो ने स्थानीय स्तर पर वैक्सीन बनाने और डिजिटल रिकॉर्ड रखने की जरूरत बताई है।
  • अंतर्राष्ट्रीय मदद: यूनिसेफ, गावी और डब्ल्यूएचओ के सहयोग से ‘बिग कैच-अप’ प्रोग्राम चलाया गया, जिसने पाकिस्तान समेत 36 देशों के लाखों बच्चों तक वैक्सीन पहुंचाई।