अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव को खत्म करने के लिए पाकिस्तान ने मध्यस्थता की बड़ी कोशिश शुरू की है। इस सिलसिले में कतर के प्रधानमंत्री और सऊदी अरब के विदेश मंत्री ने विशेष बैठक की है और पाकिस्तान के इस प्रयास पर चर्चा की है। इस बातचीत का मुख्य मकसद मध्य पूर्व में शांति स्थापित करना और दोनों देशों के बीच जारी गतिरोध को समाप्त करना है। कतर और कुवैत ने भी इस शांति प्रक्रिया को अपना पूरा समर्थन दिया है।

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पाकिस्तान की मध्यस्थता पर कतर और सऊदी अरब ने क्या चर्चा की?

कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुर्रहमान अल थानी ने सऊदी अरब, तुर्की, जॉर्डन और कुवैत के विदेश मंत्रियों के साथ पाकिस्तान की अगुवाई में चल रहे शांति प्रयासों पर विस्तृत चर्चा की है। दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि क्षेत्रीय संकटों को केवल शांतिपूर्ण बातचीत के जरिए ही हल किया जा सकता है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी घोषणा की है कि उनका देश बहुत जल्द अमेरिका और ईरान के बीच अगले दौर की बैठक की मेजबानी करने के लिए तैयार है।

अमेरिका और ईरान का इस बातचीत पर क्या रुख है?

ईरान के राजदूत रजा अमीरी मोघदम ने संकेत दिया है कि पाकिस्तान की कोशिशों के बाद शांति समझौते की दिशा में सकारात्मक प्रगति हुई है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक्छी ने स्पष्ट किया है कि बातचीत का आधार ईरान की 14-सूत्रीय योजना ही होगी। दूसरी तरफ, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे समझौते के लिए किसी भी तरह की जल्दबाजी न करें। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बातचीत में थोड़ी प्रगति की बात स्वीकार की है लेकिन बहुत ज्यादा उम्मीदें न पालने की चेतावनी भी दी है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा पर क्या फैसला हुआ?

बैठक के दौरान कतर के प्रधानमंत्री ने साफ तौर पर कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही की आजादी बुनियादी अधिकार है और इस पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने चेतावनी दी कि इसे किसी भी देश द्वारा दबाव बनाने के साधन के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। अमेरिका ने भी स्पष्ट किया है कि वह व्यापारिक जहाजों पर ईरान द्वारा टैक्स वसूलने के किसी भी प्रयास को स्वीकार नहीं करेगा।

Frequently Asked Questions (FAQs)

पाकिस्तान की मध्यस्थता के तहत अमेरिका और ईरान के बीच पहले क्या बातचीत हुई है?

पाकिस्तान ने इससे पहले अप्रैल 2026 में अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर कराने में सफलता हासिल की थी। इसके बाद अप्रैल के मध्य में दोनों देशों के बीच सबसे उच्च स्तरीय बैठक भी पाकिस्तान में आयोजित की गई थी।

इस शांति समझौते को लेकर ईरान की मुख्य मांग क्या है?

ईरान के विदेश मंत्री के अनुसार बातचीत ईरान की 14-सूत्रीय योजना के आधार पर हो रही है। ईरान का कहना है कि अमेरिका की तरफ से रखी जा रही अत्यधिक मांगें ही इस समझौते की राह में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई हैं।

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.