अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव को खत्म करने के लिए पाकिस्तान ने अपनी भूमिका बढ़ा दी है। पाकिस्तान सरकार ने साफ किया है कि वह दोनों देशों के बीच बातचीत को आसान बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस कोशिश को दुनिया के कई बड़े देशों और संगठनों ने सराहा है ताकि क्षेत्र में शांति बनी रहे।
पाकिस्तान की इस बातचीत में क्या भूमिका है?
पाकिस्तान इस वक्त अमेरिका और ईरान के बीच एक पुल की तरह काम कर रहा है। प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif और विदेश मंत्री Ishaq Dar इस मामले में काफी सक्रिय रहे हैं। पहले इस्लामाबाद में 21 घंटे तक बातचीत चली थी जिसमें पाकिस्तान ने पर्दे के पीछे रहकर मदद की थी। मालदीव के विदेश मंत्री Iruthisham Adam और संयुक्त राष्ट्र के महासचिव Antonio Guterres ने भी पाकिस्तान की इस कोशिश की तारीफ की है।
ईरान और अमेरिका के बीच अब क्या स्थिति है?
- ईरान के राजदूत ने इन बातचीत को बहुत संवेदनशील और नाजुक दौर में बताया है।
- ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि बातचीत तभी सफल होगी जब अमेरिका अपनी मांगें कम करेगा।
- प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif को उम्मीद है कि ईरान जल्द ही बातचीत पर सकारात्मक जवाब दे सकता है।
- ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने 25 अप्रैल को पाकिस्तान का दौरा किया और विवाद खत्म करने के लिए एक ढांचा साझा किया।
किन देशों और संगठनों ने पाकिस्तान की तारीफ की?
पाकिस्तान के इस कूटनीतिक प्रयास को दुनिया के कई हिस्सों में देखा जा रहा है। मालदीव ने पाकिस्तान को क्षेत्रीय शांति के लिए एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ बताया है। इसके अलावा यूनाइटेड किंगडम, चीन, रूस, कतर, तुर्की, मिस्र और ओमान जैसे देश भी इन चर्चाओं पर नजर रखे हुए हैं या इनमें शामिल हैं। विदेश मंत्री Ishaq Dar ने यूके की विदेश सचिव Yvette Cooper से फोन पर बात कर बातचीत और कूटनीति को आगे बढ़ाने की बात कही है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता क्यों कर रहा है?
पाकिस्तान क्षेत्रीय शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए दोनों देशों के बीच बातचीत को आसान बनाने की कोशिश कर रहा है ताकि तनाव कम हो सके।
ईरान ने बातचीत सफल होने के लिए क्या शर्त रखी है?
ईरान के विदेश मंत्रालय के अनुसार बातचीत की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि अमेरिका अपनी अत्यधिक मांगों को कम करे।