पाकिस्तान इस वक्त अमेरिका और ईरान के बीच फंसे विवाद को सुलझाने में पूरी ताकत लगा रहा है। हाल ही में दोनों देशों की सीधी बातचीत बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई, जिससे तनाव और बढ़ गया है। अब पाकिस्तान ‘इस्लामाबाद प्रोसेस’ के जरिए इन दोनों देशों को फिर से एक साथ लाने की कोशिश कर रहा है ताकि युद्ध की नौबत न आए।

अमेरिका और ईरान की बातचीत क्यों नहीं हो पाई सफल?

12 अप्रैल को इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान की सीधी बातचीत खत्म हुई लेकिन कोई समझौता नहीं हो सका। अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने बताया कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर असहमति की वजह से यह बात नहीं बनी। अमेरिका ने अपना आखिरी और सबसे अच्छा ऑफर दिया था, लेकिन ईरान ने इसे स्वीकार नहीं किया। वहीं ईरान के संसद स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने कहा कि अमेरिका भरोसा जीतने में नाकाम रहा और ईरान धमकियों के आगे नहीं झुकेगा।

पाकिस्तान की ‘इस्लामाबाद प्रोसेस’ और समय सीमा क्या है?

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और विदेश मंत्री इशाक डार इस विवाद को सुलझाने के लिए लगातार कोशिशें कर रहे हैं। पाकिस्तान ने इस पूरी कोशिश को ‘इस्लामाबाद प्रोसेस’ का नाम दिया है ताकि इसे एक निरंतर चलने वाली कूटनीतिक प्रक्रिया बनाया जा सके। कोशिश यह है कि 22 अप्रैल तक, जब मौजूदा युद्धविराम खत्म होगा, उससे पहले बातचीत का दूसरा दौर शुरू हो जाए।

नाकाबंदी का ऐलान और अन्य देशों का रुख

बातचीत विफल होने के बाद अमेरिका ने 13 अप्रैल को ईरानी बंदरगाहों और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की आंशिक नाकाबंदी का ऐलान किया। इस पर ईरान ने जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है। दूसरी तरफ, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने कहा है कि वे इस नाकाबंदी का समर्थन नहीं करेंगे। कतर के विदेश मंत्री ने भी दोनों देशों से शांति से बात करने की अपील की है।

तारीख मुख्य अपडेट
12 अप्रैल 2026 अमेरिका और ईरान की सीधी बातचीत बिना समझौते के खत्म हुई
13 अप्रैल 2026 अमेरिका ने बंदरगाहों की नाकाबंदी शुरू करने का फैसला लिया
22 अप्रैल 2026 मौजूदा युद्धविराम खत्म होने की संभावित तारीख
Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.