US-Iran Conflict: अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध रोकने की कोशिश, पाकिस्तान ने फिर याद दिलाई बातचीत की जरूरत
अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव को खत्म करने के लिए पाकिस्तान ने एक बार फिर बातचीत की अपील की है. पाकिस्तान चाहता है कि दोनों देश राजनयिक रास्तों का इस्तेमाल करें ताकि एक स्थायी समाधान निकल सके. प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ ने साफ किया है कि इलाके में शांति रहना पाकिस्तान के लिए बहुत जरूरी है, क्योंकि तनाव बढ़ने से पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ता है.
पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के लिए क्या कहा?
- प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ ने 22 अप्रैल 2026 को अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई.
- पाकिस्तान के विदेश मंत्री मोहम्मद इसहाक डार ने अमेरिकी चार्ज डी अफेयर्स नताली ए बेकर से मुलाकात के दौरान बातचीत की जरूरत पर जोर दिया.
- डार ने दोनों देशों से अपील की कि वे अपने दो हफ्ते के युद्धविराम (ceasefire) को आगे बढ़ाएं और कूटनीति को प्राथमिकता दें.
- पाकिस्तान ने इस्लामाबाद को इन बातचीत के लिए एक वेन्यू के तौर पर पेश किया है.
अमेरिका और ईरान का इस पर क्या रुख है?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्धविराम को आगे बढ़ाने का ऐलान किया था, लेकिन साथ ही चेतावनी भी दी कि अगर समय पर समझौता नहीं हुआ तो सैन्य कार्रवाई की जा सकती है. दूसरी तरफ, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाक़ाई ने पाकिस्तान की कोशिशों की तारीफ की, लेकिन यह साफ कर दिया कि ईरान किसी भी तरह की समय सीमा या दबाव में बातचीत नहीं करेगा. ईरान ने कहा कि वह अपने राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठा रहा है.
क्या इस्लामाबाद में होगी अगली मीटिंग?
पाकिस्तान ने 21 अप्रैल 2026 को इस्लामाबाद में बातचीत के दूसरे दौर की तैयारियां शुरू कर दी थीं और अमेरिकी एक्सपर्ट टीम वहां पहुंच चुकी थी. हालांकि, ईरान की भागीदारी को लेकर अब भी अनिश्चितता बनी हुई है. ईरानी सरकारी टीवी ने खबर दी कि अब तक कोई प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद नहीं पहुंचा है. इससे पहले 11 और 12 अप्रैल को इस्लामाबाद में हाई-लेवल मीटिंग हुई थी, जिसमें पूरा समझौता तो नहीं हुआ, लेकिन बातचीत का रास्ता जरूर खुला था.