पाकिस्तान इस समय 100 से ज्यादा जरूरी और जीवन रक्षक दवाओं की गंभीर कमी से जूझ रहा है। इसमें कैंसर और दिल की बीमारियों के इलाज में काम आने वाली दवाएं भी शामिल हैं। यह संकट पैदा होने का मुख्य कारण संघीय कैबिनेट द्वारा दवाओं की कीमतों में बदलाव को मंजूरी देने में की गई दो साल की देरी है। इस स्थिति से मरीजों की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं।
दवाओं की कीमतों में बदलाव लटका
Drug Regulatory Authority of Pakistan (DRAP) ने 105 ‘हार्डशिप कैटेगरी’ वाली दवाओं की कीमतों में बदलाव की सिफारिश दो साल पहले ही कर दी थी। ये प्रस्ताव फरवरी 2024 से संघीय कैबिनेट के पास लंबित हैं। फार्मास्युटिकल कंपनियों का कहना है कि कच्चे माल, बिजली, ट्रांसपोर्ट और लेबर की लागत बढ़ने के साथ-साथ पाकिस्तानी रुपये की गिरती वैल्यू के कारण मौजूदा कीमतों पर दवाएं बनाना मुश्किल हो गया है। इसी वजह से कई कंपनियों ने उत्पादन को कम या बंद कर दिया है।
नकली दवाओं का खतरा बढ़ा
DRAP के सीईओ Dr. Obaidullah Malik ने बताया कि रेगुलेटरी अथॉरिटी अपना काम पूरा कर चुकी है और मामला अब पूरी तरह कैबिनेट के फैसले पर निर्भर है। पाकिस्तान केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन के Abdul Samad Buddani ने चेतावनी दी है कि इस कमी का फायदा उठाकर बाजार में नकली और घटिया दवाएं बिक सकती हैं, जो मरीजों के लिए बड़ा खतरा हैं। पाकिस्तान फार्मास्युटिकल मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ने सरकार से मांग की है कि दवाओं की कीमतों से जुड़े इन लंबित मामलों को जल्द सुलझाया जाए ताकि मरीजों को दवाएं मिल सकें।
